BJP मुख्यालय प्रभारी के 'चैंबर' पर चली कैंची ! एक और 'पदधारक' की हो गई इंट्री, कक्ष के बाद पावर में तो नहीं होगा कट?

BJP मुख्यालय प्रभारी के 'चैंबर' पर चली कैंची ! एक और 'पदधारक' की हो गई इंट्री, कक्ष के बाद पावर में तो नहीं होगा कट?

PATNA: चैंबर से पदाधिकारियों की ताकत का अहसास होता है। जिनका चैंबर बड़ा वो बड़े ताकतवर माने जाते हैं. अमूमन ऐसा हर जगह होता है। लिहाजा हर किसी की इच्छा होती है कि उनके लिए बड़ा चैंबर हो। बड़ा और सुंदर कार्यालय कक्ष होने से बड़े कद के होने की सुखद अनुभूति होती है। बिहार भाजपा में भी चैंबर को लेकर पार्टी पदाधिकारियों में भीतर ही भीतर प्रतिस्पर्धा होती है। दो साल पहले भी चैंबर की उल्टा-पुल्टी हुई थी। एक बार फिर से चैंबर को 'कट' किया जा रहा है। मुख्यालय प्रभारी का चैंबर को छोटा कर दिया गया है। प्रभारी के चैंबर में एक और पदधारक की इंट्री हो गई है। कक्ष छोटा होने के बाद अब चर्चा शुरू है कि कहीं मुख्यालय प्रभारी के पावर में तो कट नहीं होगा ? 

मुख्यालय प्रभारी के चैंबर में एक और नेता की इंट्री

डॉ. संजय जायसवाल के अध्यक्ष बनने के बाद बिहार बीजेपी दफ्तर में कई बदलाव किये गये थे। पार्टी पदाधिकारियों के चैंबर को लेकर अध्यक्ष ने कई नए बदलाव किये थे। मुख्य भवन से सभी महामंत्रिय़ों को अलग कर मीडिया सेल की तरफ की बिल्डिंग में भेज दिया गया था। वहीं उपाध्यक्ष कक्ष के लिए भी मुख्य द्वार से बाहर जगह अलॉट किया गया था। पहले जो चैंबर महामंत्रियों के लिए था उसमें मुख्यालय प्रभारी को बिठा दिया गया। यानी एक तरफ अध्यक्ष तो उनके सामने मुख्यालय प्रभारी का चैंबर। वहीं अध्यक्ष के बगल वाला कमरा जो आगंतुक कक्ष था उसमें कार्यालय मंत्री व एक प्रदेश सचिव के लिए जगह दी गई थी। मुख्यालय प्रभारी को बड़ा और सुसज्जित चैंबर दिया गया था। मुख्य भवन में बड़ा चैंबर पाकर मुख्यालय प्रभारी बड़े ताकतवर माने जाने लगे थे। लेकिन वो चैंबर अब उनका अकेले का नहीं रहा। उस कक्ष में अब कार्यालय मंत्री सतपाल नरोत्तम की इंट्री हो गई है। यानी अब कार्यालय मंत्री की टेबल-कुर्सी भी मुख्यालय प्रभारी सुरेश रूंगटा के कक्ष में लगा दी गई है। सरल भाषा में आप इसे चैंबर का बंटवारा भी कह सकते हैं। कल तक मुख्यालय प्रभारी सुसज्जित चैंबर को अपना बता रहे थे वो अब पार्टनरशीप का हो गया. वहीं निर्णय लेने में भी अब मनमानी नहीं चलेगी।

कैंची चलाने के पीछे है वजह

 मुख्यालय प्रभारी के चैंबर में कार्यालय मंत्री की इंट्री के पीछे भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है। बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष ने तंग आकर यह निर्णय लिया है। वहीं जिस कक्ष में पहले कार्यालय मंत्री का टेबल लगा था एक बार फिर से वो आगंतुक कक्ष बन गया है। यानी अब उस कक्ष में अध्यक्ष से मिलने वाले या दफ्तर पहुंचे अन्य नेता-कार्यकर्ता पहुंचेंगे। एक और चर्चा है कि आगंतुक कक्ष बनाने के पीछे कोई दूसरी वजह तो नहीं? एक खास को बिठाने के लिए मुख्यालय प्रभारी के चैंबर पर कैंची तो नहीं चलाई गई?    

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