दिल्ली से बेटा भेजता था शराब की खेप, मां शहर में करती थी सप्लाई, कुछ सालों में बना ली करोड़ों की संपत्ति

दिल्ली से बेटा भेजता था शराब की खेप, मां शहर में करती थी सप्लाई, कुछ सालों में बना ली करोड़ों की संपत्ति

खगड़िया। बिहार में शराबबंदी सिर्फ कागजों में नजर आते हैं। जमीनी स्तर पर बिल्कुल भी नहीं। खगड़िया पुलिस के नाक के नीचे मां बेटे सालों से शराब का धंधा कर रहे थे। इस दौरान शराब बेचकर दोनों ने करोड़ों रुपए की प्रापटी खड़ी ली और पुलिस को उनके काम की भनक तक नहीं लगी। पुलिस को जानकारी तब हुई जब किसी ने गुप्त रूप से इसकी सूचना दी। जब पुलिस ने इन मां बेटों को गिरफ्तार किया तो वह भी उनके काम करने के तरीके को जानकार हैरान रह गई।

 मामला खगड़िया जिले के बलुआही बस स्टैंड की है। मिली जानकारी के अनुसार बेटा दिल्ली में रहकर खगड़िया अपने मां के घर शराब भेजता था। यह कारोबार काफी दिनों से चल रहा था। मोबाइल दुकान के नाम पर शराब की धंधा धड़ल्ले से हो रही थी। नगर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई मां बेटा गिरफ्तारी के साथ भारी मात्रा में विदेशी बोतल भी बरामद की है। 

करोड़ों की प्रापटी की कर ली खरीदी

बताया जा रहा है कि मां बेटे ने मिलकर शराब के धंधे से ही काली कमाई से जिले के खगड़िया हाजीपुर समेत कई जगहों पर करोड़ों का अवैध संपत्ति का मकान है। ऐसी मामलों से ही प्रतीत होता है कि नीतीश कुमार शराबबंदी कानून बिहार में कितना सफल है। खगड़िया प्रशासन शराबबंदी रोकने में बिल्कुल असफल नजर आ रहे हैं। आए दिन शराब का कारोबार के मामले जिले के विभिन्न थानाक्षेत्रों में देखने को मिलता है। जिले में आखिरकार शराब कारोबार पर कब लगेगा अंकुश कागज स्तर पर काम दिखता है। पुलिस मां बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फिलहाल पुलिस इस बात की पड़ताल में जुटी है कि दिल्ली से बिहार में शराब भेजने के लिए किन तरीकों का प्रयोग किया जाता है। पुलिस का मानना है कि इसमें और लोग शामिल हो सकते हैं।

हर गांव में शराब बनाने का धंधा

 बिहार में विगत 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। तब से लगभग 5 साल  का समय गुजर चुका है। लेकिन इन 5 सालों में शराब बनाने की चुल्हे की आग अब गांव गांव तक सुलग चुकी है। अब इस चुल्हे की आग बुझाना शासन और प्रशासन दोनों के लिए अब एक बड़ी चुनौती बन गई है। हकीकत यह है कि अब लगभग हर गांव के हर घरों में शराब बनना शुरू हो गया है। बीते 5 साल के दौरान भागीरथ प्रयास के बावजूद भी शराब बनाने व तस्करी करने का धंधा थमने के बजाय और तेजी से बढ़ रहा है। इधर बताते चलें कि लगभग 5 सालों के प्रयास के बाद भी नहीं थम रहा है तस्करी का धंधा। अब तो ऐसी स्थिति बन गई है कि, गली गली में शराब तस्करों का नेटवर्क बन गया है। पूर्ण शराबबंदी के पहले  कई गांव इस मामले में आदर्श माने जाते थे। लेकिन पूर्ण शराबबंदी के दौर में शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां कि यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि , यहां शराब नहीं बनती है या फिर शराब नहीं बिकती है। हालांकि एएसपी अमितेश कुमार कमान संभालने के बाद जिले में शराब के धंधे को नेस्तनाबूद करने के लिए  लगभग हर रोज अलग अलग इलाकों में छापामारी की जा रही है। हर रोज शराब बरामद व भठठी ध्वस्त कर रहे हैं।


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