Bihar News : जल जीवन हरियाली अभियान से दम तोड़ रहे जलस्रोतों की लौटी मुस्कान, सात वर्ष में 26 हजार से अधिक तालाब-पोखर का हुआ जीर्णोद्धार

Bihar News : बिहार में जल जीवन हरियाली अभियान से दम तोड़ रहे जलस्रोतों को नया जीवन मिला है. सात वर्षों ने हज़ारों तालाब और पोखर का जीर्णोद्वार किया गया है......पढ़िए आगे

Bihar News : जल जीवन हरियाली अभियान से दम तोड़ रहे जलस्रोतों
दम तोड़ रहे जलस्रोतों को मिला जीवन - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : जल-जीवन-हरियाली अभियान का अवयव-2 गांवों में दुर्व्यवस्था के शिकार पारंपरिक जल संचयन स्रोत तालाब, पोखर, आहर और पइन के लिए आज वरदान बन चुका है। बिहार में वर्ष 2019 से शुरू अभियान ने अंतिम सांस गिन रहे इन जलस्रोतों में प्राण फूंकने का काम किया है। अभियान का परिणाम आज राज्य भर में पानी से लबालब भरे तालाब-पोखर जैसे जलस्रोतों में पशु-पक्षियों के कलरव के रूप में देखा जा सकता है। इन पोखर और तालाब से ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ पीने की पानी की किल्लत खत्म हुई है बल्कि किसानों की फसल सिंचाई के लिए भी एक नया विकल्प तैयार हो चुका है। आज से सात वर्ष पहले शुरू हुए इस अभियान में अभी तक राज्य भर में 26 हजार 383 तालाब-पोखर का जीर्णोद्धार, नवनिर्माण किया जा चुका है। राज्य में सबसे अधिक वर्ष 2019-20 में सात हजार 137 तालाब-पोखर का जीर्णोद्धार किया गया। इसके बाद चार हजार 494 तालाब-पोखऱ का वर्ष 2020-21 में, चार हजार 419 तालाब-पोखर का वर्ष 2022-23 में, तीन हजार 624 तालाब-पोखर का वर्ष 2023-24 में, दो हजार 625 तालाब-पोखर का वर्ष 2021-22 में, दो हजार 474 तालाब-पोखर का वर्ष 2024-25 में और एक हजार 612 तालाब-पोखर का वर्ष 2025-26 में जीर्णोद्धार-नवनिर्माण किया गया। 

भूजल स्तर में सुधार

ग्रामीण विकास विभाग के पदाधिकारियों का कहना है कि अभियान के तहत राज्य में इन तालाब और पोखरों के जीर्णोद्धार के सहारे भूजल स्तर में वृद्धि, सिंचाई क्षमता में सुधार, और अतिक्रमित जल स्रोतों को मुक्त कराया जा रहा है। जल संचयन संरचनाओं को पुनर्जीवित करने से ग्रामीण क्षेत्रों की पारिस्थितिकी और कृषि को मजबूती मिलेगी।

औरंगाबाद में 1675 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण

ग्रामीण विकास विभाग की मानें तो जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत महत्वपूर्ण जिला औरंगाबाद में अभी तक 1675 नए जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है।  इसमें सबसे अधिक 2019-20  में 1069, 2023-24  में 205, 2022-23  में 151, 2020-21  में 118, 2021-22  में 87 तो 2024-25  में 45 तालाब और पोखरों का निर्माण किया गया।

फसलों की सिंचाई के लिए खुला नया रास्ता

औरंगाबाद के पतेया निवासी उदय प्रसाद बताते हैं कि गांव में उपलब्ध दशकों पुराना पोखर हमेशा सूखा रहता था। उड़ाही नहीं किए जाने की वजह से पोखर में जल ठहराव नहीं होने की समस्या थी। गांव में जलस्रोत के नहीं होने से चापाकल और सिंचाई का ट्यूबवेल भी फेल्योर हो गया था। हाल के कुछ वर्ष पहले पोखर का जीर्णोंधार किए जाने से गांव के लोगों की कई सुविधाएं बढ़ गई हैं। मौजूदा समय में पोखर से जहां किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल की उपलब्धता बनी रहती है वहीं दूसरी ओर पशु-पक्षियों के पीने के लिए पानी भी मिल जाता है। 

डेढ़ हजार से अधिक लोगों को मिल रहा लाभ

पतेया के ही पंकज कुमार का मानना है कि पोखर की उड़ाही और दूसरे विकास कार्य किए जाने का लाभ आज गांव में करीब डेढ़ हजार लोग उठा रहे हैं। पोखर का सौंदर्यीकरण किए जाने के बाद यहां सुबह-शाम लोगों के लिए टहलने की सुविधा उपलब्ध हो गई है। साथ ही भूगर्भ जलस्तर में भी तेजी से सुधार आया है। गर्मी के दिनों में पशु-पक्षियों के लिए यह पोखर अब वरदान साबित होगा।

मंत्री ने कहा 

ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा की  जल-जीवन-हरियाली अभियान जलवायु परिवर्तन की समस्या से बचने के लिए वरदान साबित होगा। गांवों में तालाब और पोखर के निर्माण से भूगर्भ जलस्तर तेजी से सुधर रहा है। गांवों में खुशहाली लौट आई है। जलस्रोत से जहां किसानों की फसल सिंचाई के लिए एक नया विकल्प तैयार हो गया है वहीं पारंपरिक जलस्रोतों से संरक्षण और संवर्धन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।