राजनीतिक रोटी सेंक रहे अश्विनी चौबे ? 86 दिनों तक किसान आंदोलन से दूर रहे..चौसा में खदेड़े गए केंद्रीय मंत्री तो पटना आकर कर रहे PC

राजनीतिक रोटी सेंक रहे अश्विनी चौबे ?  86 दिनों तक किसान आंदोलन से दूर रहे..चौसा में खदेड़े गए केंद्रीय मंत्री तो पटना आकर कर रहे PC

PATNA: बक्सर में किसान आंदोलन जारी है। यह आंदोलन करीब 90 दिनों से जारी है। जमीन के बदले उचित मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं था. स्थानीय सांसद सह केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे भी किसान आंदोलन से अपने आप को दूर रखा। उन्होंने किसानों को अपना समर्थन देना मुनासिब नहीं समझा. पिछले हफ्ते जब बक्सर पुलिस की गुंडागर्दी सामने आई और बेकसूर किसानों की पिटाई की गई तब जाक नींद खुली और राजनीतिक लाभ लेने चौसा पहुंच गए। हालांकि इस दौरान किसान आंदोलन में पहुंचे केंद्रीय मंत्री को स्थानीय लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा. लोगों के भारी विरोध के बाद अश्विनी चौबे उल्टे पांव भागे थे। किसानों की सुध नहीं लेने अश्विनी चौबे अब पटना आकर ऐलान कर रहे कि किसान विरोधी नीतीश सरकार को जब तक सत्ता से बेदखल नहीं करूंगा शांत नहीं बैठूंगा।

86 दिनों तक अता पता नहीं अब किसानों की कर रहे बात

बिहार बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में अश्विनी चौबे ने कहा कि बक्सर के चौसा में किसानों पर जो अत्याचार हुआ, उसको लेकर मै 24 घंटे उपवास में रहा। बक्सर में मेरे ऊपर जानलेवा हमला हुआ। किसानों के लिए मैं जो आंदोलन कर रहा हूं उसे रोकने के लिए हमला हुआ। मेरे बॉडीगार्ड ने मुझे वहां पर बचाया। स्थानीय पुलिस के तरफ से मुझे कोई सहायता नहीं मिली। केंद्रीय मंत्री ने कहा की किसानों की समस्या का समाधान किसानों के बिना राय लिए हुए नहीं होगी। उन्होंने कहा की बक्सर में एक अदना अधिकारी किसानों का दमन कर रहा है। बिहार से सांसद हूं और केंद्रीय मंत्री भी। उसके बावजूद भी मुझे सुरक्षा नहीं दी गई। मेरे सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया। यह प्रोटोकॉल नियमों का उल्लंघन है। चौसा में किसानों को चुप कराने के लिए पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्ण कार्य हुआ है। जिन पुलिसकर्मियों ने किसान की मां और बहन और बेटियों की पिटाई की है। उनको राज्य सरकार नौकरी से हटाए। किसानों के आंदोलन के पीछे साजिश के तहत हिंसा की गई। इसका खुलासा होना चाहिए। 

सांसद को किसानों से क्या मतलब...आग लगने पर राजनीतिक रोटी सेकना मकसद 

बिहार के जाने-माने आरटीआई कार्यकर्ता सह बक्सर निवासी शिवप्रकाश राय कहते हैं कि अब तो चौसा का बनारपुर राज नेताओ के लिये तीर्थ से भी बड़ा स्थान हो गया है. 86 दिन से चल रहे धरना में स्थानीय एमपी, विधायक या फिर आज जो नेता आ रहे हैं, शामिल हुए होते तो किसानों की ये दुर्दशा नहीं होतीं .मगर नेता तो आग लगने के बाद ही राजनीतिक रोटी सेकने पहुँचते हैं.उन्होंने कहा कि 10 जनवरी को जब पुलिस किसानो के घर में घुसी तो स्थानीय सांसद अश्विनी चौबे 12 तारीख को बनारपुर पहुँचे ते. लेकिन वहां इनको विरोध का सामना करना पड़ा. इनको किसानो से क्या मतलब है, अगर स्थानीय सांसद सह केंद्रीय मंत्री को मतलब रहता तो यह घटना नहीं होती.

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