तो क्या जदयू में शामिल होंगी मो शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ! बड़े साहब से बात होने की चर्चा

तो क्या जदयू में शामिल होंगी मो शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ! बड़े साहब से बात होने की चर्चा

सिवान की राजनीति में साहेब का दर्जा रखने वाले राजद के कद्दावर नेता पूर्व सांसद मो शहाबुद्दीन के निधन के बाद सिवान की सियासत में एक ऐसी शून्यता देखने को मिल रही है, जिसे भरने के लिए तमाम राजनीतिक पार्टियां कवायद करने लगी हैं। दिल्ली के हॉस्पीटल में मो शहाबुद्दीन की मौत के बाद उनके कोरोना रिपोर्ट के निगेटिव आने व अंतिम संस्कार में तमाम तकलीफों को देखने के बाद जिस तरह से शहाबुद्दीन के समर्थकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। जानकारों की माने तो इन सारे घटनाक्रम से सिवान की सियासत में आने वाले दिनों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। 

क्या सीएम से हुई बात

सिवान की राजनीति की पर पकड़ रखने वालों की बातों पर यकीन करें तो उनके अनुसार मो शहाबुद्दीन के निधन के बाद सीएम नीतीश कुमार ने पूर्व सांसद के परिवारजनों से बातें की हैं। चर्चा इस बात की भी है कि दिल्ली से दिवंगत पूर्व सांसद के परिवार के सिवान लौटने के बाद हिना शहाब अपने समर्थकों के साथ जदयू में भी शामिल हो सकती हैं। इस बात के भी कयास लग रहे हैं कि सीएम के इस पहल के बाद पूर्व सांसद के परिवार ने भी नरम रुख दिखाया है और इस बात को देखते हुए ही हिना शहाब के जदयू में शामिल होने की बात को मजबूती मिल रही है। 

तो क्या राजद छोड देंगी हिना

दरअसल प्रदेश के अल्पसंख्यक समुदाय में अपनी गहरी पकड़ रखने वाले मो शहाबुद्दीन के निधन के बाद कोरोना रिपोर्ट, पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार में हुई परेशानियों पर जिस तरीके से अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरों के साथ शहाबुद्दीन के समर्थकों ने रुझान दिखाया है, उसमें यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि सिवान आने वाले दिनों में सियासत के नये रंग में रंगा हुआ नजर आये। गौरतलब है कि प्रदेश की विभिन्न पार्टियों की तरफ से शहाबुद्दीन के समर्थन में उठने वाले बयान के बाद उनके समर्थकों ने मुखर तरीके से अपनी बातों को रखना शुरू किया और अपनी नाराजगी को जताते हुए इस्तीफा भी देने लगे। समर्थकों के टूटने के बाद राजनीति का ऊंट सिवान में किसी भी करवट बैठ सकता है। हालांकि दिवंगत पूर्व सांसद के बेटे ओसामा शहाब ने इस बात पर जरूर जोर दिया है कि इन सारी बातों के बाद भी उनका या उनके परिवार का राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, तेजस्वी यादव या फिर राजद से कोई गिला शिकवा नहीं है। बहरहाल सिवान की सियासत में आने वाले दिनों में उलटफेर देखने को मिल जाये तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।






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