SP-DSP के निलंबन से हड़कंपः बालू लूट में लपेटे में आने से बच निकले पटना 'ADTO' समेत कई अफसर, जांच जारी...

SP-DSP के निलंबन से हड़कंपः बालू लूट में लपेटे में आने से बच निकले पटना 'ADTO' समेत कई अफसर, जांच जारी...

PATNA: बालू से कमाई करने वाले अधिकारियों नीतीश सरकार की सख्ती से अवैध धंधे में लिप्त अधिकारियों में भय व्याप्त है। मंगलवार को सरकार ने दो तत्कालीन एसपी, 4 डीएसपी,एक एसडीओ समेत 16 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सरकार के इस कार्रवाई से हड़कंप है। मुख्यमंत्री ने चार दिन पहले ही साफ कर दिया था कि गड़बड़ी होने नहीं देंगे। एक-एक चीज पर नजर रखे हुए हैं. तब सीएम नीतीश ने कहा था कि सरकारी तंत्र में गड़बड़ी करने वालों को छोड़ते हैं क्या... कार्रवाई हुई तो कुछ लोगों को पता चला न....। नीतीश कुमार के इस सख्त रूख के बाद यह साफ हो गया था कि बालू खनन में लिप्त रहने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।  हालांकि बालू खनन में परिवहन समेत दूसरे विभाग के कुछ अधिकारी साफ बच भी निकले हैं। वैसे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है। खनन विभाग ने भी मंगलवार को एक बार फिर से अपने बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई किया है। 

सरकार की कार्रवाई से हड़कंप

 राज्य सरकार ने बालू के अवैध खनन मामले में दो आइपीएस अधिकारी सुधीर कुमार पोरिका व राकेश दुबे समेत 16 पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्रवाई की जद में खनन विभाग के सहायक निदेशक संजय कुमार भी आए हैं। इसके अलावा दो खनन पदाधिकारियों की सेवा सहकारिता विभाग को वापस करते हुए उन्हें निलंबित किए जाने की अनुशंसा की गई है।  निलंबित अफसरों में औरंगाबाद और भोजपुर के तत्कालीन एसपी, डेहरी के एसडीओ सुनील कुमार सिंह, चार एसडीपीओ, तीन अंचलाधिकारी, पांच खनन पदाधिकारी और एक मोटरयान निरीक्षक (एमवीआइ) भी शामिल हैं। इन सभी अफसरों को आर्थिक अपराध इकाई की जांच रिपोर्ट के आधार पर पहले ही पद से हटा दिया गया था। अब मंगलवार को निलंबन की कार्रवाई की गई है। सभी अफसरों पर अलग से विभागीय कार्यवाही भी होगी। इसके अलावा बिहटा के सीओ विजय कुमार सिंह और बिक्रम के सीओ वकील प्रसाद सिंह को उनके पद से हटाते हुए उनकी सेवा उनके पैतृक विभाग क्रमश: सहकारिता विभाग व योजना विकास विभाग में वापस कर दी गई है। 

ईओयू की जांच जारी

विभागीय जानकार बताते हैं कि सरकार के आदेश पर आर्थिक अपराध इकाई ने जांच की। जांच के बाद बालू खनन में संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। सूत्र बताते हैं कि इस ऑपरेशन में कई अधिकारी साफ बच निकलने में कामयाब भी रहे हैं। पटना की बात करें तो पालीगंज एसडीपीओ को पहले हटाया गया फिर सस्पेंड किया गया है। वहीं डीटीओ और दो एमवीआई को अवैध बालू के परिवहन  में मिलीभगत के आरोप में हटा दिया गया। इसमें डीटीओ और एमवीआई तो नप गये लेकिन बीच वाले अफसर एडीटीओ जिनपर अवैध परिवहन में लगी गाड़ियों को जब्त करने या फाइन का जिम्मा था वो बच निकले. बताया जाता है कि हैंड डिवाईस का जिम्मा पटना के तत्कालीन एडीटीओ के पास ही था। बालू ढुलाई में परिवहन समेत कई विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की बात सामने आई है। इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आई तो परविहन विभाग ने पटना के तत्कालीन एडीटीओ को मुजफ्फरपुर का डीटीओ बना दिया है।  मंगलवार को विधानसभा में खनन मंत्री जनक राम ने कहा कि बालू खनन में संलिप्तता की जांच ईओयू कर रही है। आगे जैसे-जैसे सबूत मिलेगा कार्रवाई जारी रहेगी। 

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डीटीओ-एमवीआई के बीच वाले अधिकारी (ADTO) बच निकले 

पटना जिले की बात करें तो बालू खनन में संलिप्तता के आरोप में डीटीओ और दो एमवीआई पर कार्रवाई की गई है। हालांकि इस कार्रवाई में एडीटीओ बच गये। पटना में डीटीओ,एडीटीओ,तीन एमवीआई और चलंत दस्ता के रूप में 5 परिवहन दारोगा तैनात हैं। आर्थिक अपराध इकाई की जांच के आधार पर डीटीओ पुरूषोत्तम, एमवीआई विवेक कुमार और पटना से गया में पदस्थापित किये गये मृत्युंजय कुमार सिंह को हटाया गया। हालांकि कम ही लोग जानते थे कि पटना जिले में एडीटीओ की भी तैनाती थी। विभागीय सूत्रों ने बताया कि पटना के एडीटीओ लाल ज्योतिनाथ शाहदेव भी महत्वपूर्ण जिम्मा संभाल रहे थे। उन पर भी बालू की अवैध ढुलाई करने वाले वाहनों पर नजर रखने की जिम्मेदारी थी। बालू के अवैध खनन में संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई की गुंज सुनाई देने से पहले ही पटना के एडीटीओ लाल ज्योतिनाथ शाहदेव को मुजफ्फरपुर का डीटीओ बना दिया गया। गृह विभाग ने 9 जुलाई को बालू खनन में संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर पत्र भेजा। इधर  परिवहन विभाग ने 12 जुलाई को पटना एडीटीओ को मुजफ्फरपुर डीटीओ के पद पर पदस्थापन के संबंध में आदेश जारी कर दिया। जैसे ही कार्रवाई की भनक लगी पटना के एडीटीओ ने आनन-फानन में 14 जुलाई को मुजफ्फरपुर डीटीओ का कार्यभार संभाल लिया. 

औरंगाबाद की बात करें तो औरंगाबाद के एसपी सुधीर कुमार पोरिका औरंगाबाद सदर के एसडीपीओ अनुप कुमार को सस्पेंड किया गया।  जिले के डीटीओ अनिल कुमार सिन्हा जो रोहतास के भी प्रभार में थे उन्हें भी हटा दिया गया .वहीं रोहतास के अनुमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह भी बालू के अवैध खनन के आरोप में नप गये. औरंगाबाद की बात करें तो जिले के एसपी,एसडीपीओ व डीटीओ नप गये। हालांकि बालू के अवैध परिवहन रोकने,जब्त या फाइन करने वाले अफसर यानी एमवीआई जांच की जद में आने से बच गये। 30 जून तक औरंगाबाद  के एमवीआई रहे उपेन्द्र राव को स्थानांतरित कर पूर्णिया भेजा गया है। उन्हें पूर्णिया के साथ -साथ मधेपुरा का भी चार्ज दिया गया।

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