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राज्यों के चुनाव में होगी धुरंधरों की परीक्षा,मोदी बनाम इंडिया महागठबंधन की लड़ाई में कौन पड़ेगा किस पर भारी

राज्यों के चुनाव में होगी धुरंधरों की परीक्षा,मोदी बनाम इंडिया महागठबंधन की लड़ाई में कौन पड़ेगा किस पर भारी

दिल्ली- राहुल गांधी को उन बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है जो आने वाले महीनों में कांग्रेस और भारत की राजनीतिक स्थिति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती हैं. वह इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं, यह उनके भविष्य और समग्र रूप से भारतीय राजनीति के भविष्य को तय करने में महत्वपूर्ण होगा. मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का ताजा प्रयास पिछले हफ्ते एनडीए के बहुमत के कारण विफल हो गया.क्या मणिपुर संकट का असर नवगठित विपक्षी गठबंधन इंडिया के पक्ष में हो सकता है? क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी इसका उपयोग उसी तरह कर सकेंगे जैसा कि एक अन्य विपक्षी नेता ममता बनर्जी ने 2011 के विधानसभा चुनावों में जीत के लिए पश्चिम बंगाल के सिंगूर और नंदीग्राम मामले में किया था? ये महत्वपूर्ण क्षण दुर्लभ और अविस्मरणीय हैं.



राहुल को इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए परिपक्वता दिखाने और एक नया आख्यान विकसित करने की जरूरत है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम सभी चुनाव की तैयारी कर रहे हैं. आम आदमी के नारे ने 2004 से 2014 तक पार्टी की सफलता और सत्ता बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आम आदमी से संबंधित रोजी-रोटी के मुद्दों को उठाना महत्वपूर्ण है. ये चुनाव जीतना राहुल के राजनीतिक कॅरियर में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. राहुल को शरद पवार (एनसीपी), ममता बनर्जी (टीएमसी), नीतीश कुमार (जद यू), एमके स्टालिन (द्रमुक) और अखिलेश यादव (सपा) जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेताओं का समर्थन हासिल करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.






दिसम्बर में मध्यप्रदेश ,राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव है.इंडिया गठबंधन का कहना है कि इन राज्यों में उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा होगा. विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन  अच्छा रहता है और उसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में आशातीत सफलता मिलती है तो इसका असर भी इंडिया गठबंधन पर सकारात्मक असर पड़ेगा ,इसमें संदेह नहीं है. इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा .इस साल के आखिर में होने राज्यों के विधानसभा चुनाव हों या अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव, सत्ता पक्ष एनडीए और विपक्षी गठबंधन इंडिया के बीच भीषण चुनावी लड़ाई होने की पूरी संभावना है.



वहीं पहले लोकसभा में और फिर स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार अपनी सरकार बनाने का दावा करके साफ संकेत दे दिया है कि अपनी तीसरी जीत के लिए मोदी के नेतृत्व में भाजपा तमाम रणनीति अपना सकती है,जो जीत दिलाए. प्रधानमंत्री मोदी का ये दावा विपक्षी गठबंधन इंडिया के लिए चुनौती है .



मोदी को हटाने के लिए एक साथ आए इंडिया गठबंधन के कांग्रेस समेत 26 दल और उनके नेता मोदी के इस अति विश्वास का मुकाबला क्या लोकसभा चुनावों में भी अपने उसी हौसले से करेंगे जैसे ये दल अपने अपने राज्यों के विधानसभा चुनावों में करते आए हैं.क्योकि कांग्रेस और आप के झगड़े का खुलासा हो चुका है.अविश्वास प्रस्ताव में हुई बहस के दौरान जिस तरह सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर हमले किए उससे यह तय हो गया है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में मुकाबला सत्ताधारी एनडीए के आत्मविश्वास और विपक्षी इंडिया गठबंधन के हौसले के बीच होगा.



राहुल गांधी को 26 दलों और उनके नेताओं का समर्थन प्राप्त है जिनमें एक भी पूरे देश में अकेले भाजपा से टक्कर लेने की स्थिति में नहीं है. कांग्रेस समेत 26 दलों के नए गठबंधन के जन्म से लेकर अविश्वास प्रस्ताव तक विपक्षी इंडिया गठबंधन ने जो एकता और आक्रामकता दिखाई है, उसने एनडीए  में खलबली तो मचा हीं दी है. अब अगली बैठक 31 अगस्त और एक सितंबर को मुंबई में शरद पवार उद्धव ठाकरे और कांग्रेस की संयुक्त मेजबानी में हो रही है,इसने भी भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी हैं.वहीं राहुल गांधी ने खुद को एक आत्मविश्वासी नेता के रूप में पेश किया है, जो आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने के लिए तैयार है. इसके अतिरिक्त, उन्होंने घोषणा की है कि भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा भाग शीघ्र ही शुरू किया जायेगा.




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