स्वतंत्रता की कहानी अखबारों की जुबानी : देश की आजादी के पहले दिन अखबारों में क्या छपा? जानिए

पटना- नियति द्वारा सुनिश्चित वह शुभ दिन आ गया है. हमारा भारत देश लंबी निद्रा और संघर्ष के बाद सुनहरे भविष्य लिए पुन: जागृत, जीवंत, मुक्त और स्वतंत्र खड़ा है. काफी हद तक हमारा भूतकाल अभी भी हमें जकड़े हुए है, और हम प्राय: जो प्रतिज्ञा, जो संकल्प अब तक करते आए हैं उसे निभाने के लिए हमें बहुत कुछ करना होगा. आज रात बारह बजे, जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता की नई और उजली चमकती सुबह के साथ उठेगा. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु का नियति से सुनिश्चित दिन आ गया , पूरब से भारत का नया सूरज उग  चुका था, देश आजादी की सांस ले रहा था, लगभग दो सौ साल की ब्रिटिश हुकुमत से छुटकारा मिल चुका था, 15 अगस्त, 1947 का दिन हर भारतवासी के लिए अहम था. यह दिन भावुकता भरा और ऐतिहासिक था. अंग्रेज देश से विदा हो रहे थे. देश स्वतंत्रता की हवा में पहली सांस लेने वाला था. देश के हर अमीर-गरीब के आजाद होने की घोषणा 15 अगस्त 1947 की सुबह छपने वाले अखबारों में हुई थी,  15 अगस्त 1947 के अखबार हमेशा के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज बन गए.

 'हिंदुस्तान' ने अपने पहले पन्ने  पर लिखा 'शताब्दियों की दासता के बाद भारत में स्वतंत्रता का मंगल प्रभात.' हिंदुस्तान ने 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा' के नारे के साथ नए भारत की एक तस्वीर छापी. 

टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार ने 15 अगस्त 1947 को अपने पहले पन्ने पर लीड खबर लिखी 'Birth of India's Freedom' यानी 'भारत की आजादी का जन्म'. इस अखबार ने पंडित नेहरू की तस्वीर के साथ देश की पहली कैबिनेट का ब्योरा दिया. 

'द हिंदुस्तान टाइम्स' ने लिखी 'इंडिया इंडिपेंडेंट: ब्रिटिश रूल एंड्स' यानी 'भारत आजाद हुआ: ब्रिटिश शासन का अंत'. इसी अखबार ने पहले पन्ने पर पंडित नेहरू और डॉ. राजेद्र प्रसाद की तस्वीर छापी. साथ में, यह भी बताया कि अब संविधान सभा ने काम संभाल लिया है. 

इसके अलावा, बाकी भाषाओं के प्रमुख अखबारों ने भी देश की आजादी की खबरों को प्रमुखता से छापा. ज्यादातर अखबारों ने देश और इतिहास को सूचित किया कि भारत अब एक आजाद देश है और इसकी तकदीर अब वह खुद ही लिखेगा. देश की बागडोर प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संभाल ली थी. मूसलाधार बारिश हो रही थी और संसद में नेहरु ऐलान कर रहे थे, ‘आधी रात को जब पूरी दुनिया सो रही है, भारत जीवन और स्वतंत्रता की नई सुबह के साथ उठेगा.’ उनके इस भाषण को
नाम दिया गया ‘ए ट्राईएस्ट विद डेस्टिनी’, जिसका अर्थ भाग्य के साथ एक प्रयोग कहा जा सकता है. इस बार 15 अगस्त की तारीख़ स्वतंत्रता दिवस पर देश के लिए आजादी का उत्सव लेकर आई तो वहीं दूसरी तरफ हजारों की संख्या में भारत माता के उन वीर सपूतों को याद देती रही, जिन्होंने हंसते हुए देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी. ’ नेहरु के भाषण ने भारत के लोगों के लिए एक नई मुक्त सुबह की उम्मीद जगाई और देश को भौगोलिक और आंतरिक रूप से सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने के बावजूद साहस को प्रेरित किया. नेहरु ने अपने भाषण में कहा, ‘ये ऐसा समय होगा जो इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है.इसकी ऐतिहासिक रिपोर्टिंग उस समय के अखबारों ने की थी. वे अखबारआज आजादी के दस्तावेजों में शुमार हैं.