फिर गरजे सुधाकर,बिहार में राजद नहीं नीतीश की सरकार..हालत बहुत खराब...और खूब बोले..सुन लीजिए

फिर गरजे सुधाकर,बिहार में राजद नहीं नीतीश की सरकार..हालत बहुत खराब...और खूब बोले..सुन लीजिए

PATNA : बिहार के पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह राजद नेतृत्व ने नीतीश कुमार के खिलाफ बयानबाजी को लेकर 15 दिन का नोटिस दिया है। ऐसे में सुधाकर सिंह ने अपना जवाब देने से पहले एक बार फिर मुख्यमंत्री को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक अखबार को दिए साक्षात्कार में सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार में राजद नहीं नीतीश कुमार की सरकार है और महागठबंधन में होनेवाले सारे फैसले लेने का अधिकार उन्हें दिया गया है। उन्हें ही तय करना है कि कैसे सरकार चलाएंगे।

नीतीश कुमार के आपत्तिजनक बातें कहने को लेकर उन्होंने साफ कहा कि एक भी आपत्तिजनक शब्द नहीं हैं। मैंने अब तक जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है, वे संसदीय शब्द है। हमलोगों को सिखाया जाता है कि विधान सभा में क्या संसदीय है क्या नहीं। मैंने अभी तक किसी असंसदीय शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। सुधाकर सिंह ने कहा उनकी बातें कड़ी हो सकती है अससंदीय नहीं।

किसानों की पिटाई के लिए बिहार सरकार को बताया जिम्मेदार

बक्सर के चौसा में पुलिस द्वारा किसानों की पिटाई के लिए सुधाकर सिंह ने  सीधे सीधे नीतीश सरकार को जिम्मेदार बताया। सुधाकर सिंह ने साफ कहा कि बिहार सरकार सिर्फ किसान हितैषी होने की बात करती है। सच्चाई यह है कि किसान समर्थक या किसान हितैषी तो कतई नहीं है।

बिहार सरकार का दोष है कि उन्होंने लाठी चार्ज करवाया। अपने ही किसानों पर जो वास्तविक मुद्दों पर लड़ रहे थे। सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए। लेकिन इसके उलट कंपनियों के प्रभाव में आकर भारत सरकार के निर्देश पर किसानों पर लाठी चलायी गई। समाजवादी पार्टियों की सरकारें ऐसा नहीं करती है।

कृषि रोड मैप में खरबों रुपए बर्बाद हुए

सुधाकर सिंह ने एक बार फिर मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट कृषि रोड मैप पर सवाल उठाया। सुधाकर सिंह ने कहा वन, टू और थ्री के बाद अब चौथी बनाने की बात हो रही है। देख लें कि पहले के कृषि रोड मैप की उपलब्धि शून्य है। डॉ. मंगला राय के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में बिहार फेल हो गया। फिर से चौथे कृषि रोड मैप के लिए सरकार ने उनकी नियुक्ति की है। करोड़ों नहीं, अरबों नहीं बल्कि खरबों रुपया लगा हुआ है इसमें। जो पूरी तरह से बर्बाद हो रहे हैं। सुधाकर सिंह ने कृषि रोड मैप ऐसी योजना है, जिसकी ऑडिट जांच होनी चाहिए। पूर्व कृषि मंत्री ने कहा कि इसके लिए उन्होंने पत्र लिखा था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जाहिर है सरकार में ऊपर बैठे लोग नहीं चाहते हैं कि चीजें ठीक हों।

किसानों को लेकर बिहार सरकार की मंशा साफ नहीं

किसानों के अनाज की खरीद में अवैध लेन-देन व्यापक पैमाने पर है। इसमें पैक्स के अलावा मल्टीएजेंसियों को शामिल किया जाए। मेरी मांग प्राइवेट एजेंसियों को लाने की नहीं है, सरकार की कई कॉपरेटिव एजेंसियां हैं। इससे किसानों को अनाज का उचित मूल्य मिल पाएगा। लेकिन बिहार की सत्ता में बैठे लोगों की मंशा साफ नहीं है।

नोटिस के जवाब देने को लेकर कहा

सुधाकर सिंह ने 15 दिनों के नोटिस को लेकर कहा  मैं पार्टी की नीतियों, सिद्धांतों और संविधान से बंधा हुआ हूं। मैं समय सीमा के अंदर अपना पक्ष प्रस्तुत कर दूंगा। मैं इस पर नहीं जाना चाहता हूं कि नोटिस में क्या लिखा है और मेरा जवाब क्या होगा। पार्टी जैसा निर्णय लेगी, हम पार्टी के साथ काम करते रहेंगे।


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