नवादा में बालू की कलाकृति से सजा तमसा घाट; राम दरबार, वनवास, सबरी की भक्ति सहित राम के कई आदर्शों की उकेरी कलाकृति

नवादा में बालू की कलाकृति से सजा तमसा घाट; राम दरबार, वनवास, सबरी की भक्ति सहित राम के कई आदर्शों की उकेरी कलाकृति

नवादा. जिले के हिसुआ में 14 नवंबर को  तमसा महोत्सव के लिए हिसुआ का प्रसिद्ध तमसा नदी घाट बालू की कलाकृति से सज रहा है. कलाधर डॉ. शैलेंद्र प्रसून और देवेंद्र विश्वकर्मा राम के संदेशो के साथ बालू की कलाकृतियों को जीवंत कर रहे हैं. राम-सीता बनवास, सबरी की भक्ति, लव-कुश और अश्वमेघ घोड़ा, राम दरबार आदि की कालकृतियां उकेरी गयी है. देवोत्थान एकादशी 14 नवंबर को नदी बचाओ अभियान का तमसा महोत्सव की तैयारी है.

स्कूली बच्चों की रंगोली से घाटों को सजेंगे. 12 बजे से रंगोली प्रतियोगिता होगी. दूसरे सत्र में दिन के दो बजे से कवि सम्मेलन और उसके बाद दीपोत्सव का कार्यक्रम होगा. आयोजन समिति के व्यंग्यकार उदय भारती ने बताया कि यह हिसुआ की सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन है, जिसकी शुरूआत 2015 में साहित्यकारों ने किया थाय शिक्षाविद् व साहित्यकार मिथिलेश सिन्हा के संयोजन में इसकी शुरुआत हुई थी. नदी और पर्यावरण बचाने के संदेशों का महा अभियान है. बच्चे और कवि नदी और पर्यावरण से जुड़ी प्रस्तुति देते हैं. पुरस्कार और सम्मान दिये जाते हैं.

कलानिधि डॉ. शैलेंद्र प्रसून ने कहा कि राम हमारे आदर्श हैं. इसलिए उनके संदेशों की कलाकृति यहां पर उकेर रहे हैं. आम लोगों को राम के आदर्शों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा. कलाधर देवेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि नदी के संरक्षण के लिए बालू की कलाकृति बनाते हैं. नदी को अतिक्रमण से बचाने के लिए नदियों का सम्मान हो. 

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