तेजस्वी यादव इस दिन जाएंगे रांची, समस्या का करेंगे समाधान, जेडीयू का तंज- रूटीन होगा फेल...

तेजस्वी यादव इस दिन जाएंगे रांची, समस्या का करेंगे समाधान, जेडीयू का तंज- रूटीन होगा फेल...

पटना : बिहार में संख्या के लिहाज से देखें, तो आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है. जिसका जिक्र तेजस्वी यादव अकसर सीएम नीतीश कुमार को घेरने के लिए करते रहते हैं. अब तेजस्वी यादव ने झारखंड में पार्टी को मजबूत करने के लिए कमर कस ली है. इसी कड़ी में तेजस्वी यादव आगामी 19 अगस्त को रांची जा रहे हैं. और पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से वन टू वन मुलाकात करेंगे. तेजस्वी यादव झारखंड में चल रही आरजेडी की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे और जो समस्याएं सामने आएंगी, उसे दूर करेंगे. इस बार रांची में तेजस्वी यादव के आगमन को आरजेडी भव्य तैयारी कर रही है. साथ ही पहले से ही ये तय किया जा चुका है कि तेजस्वी यादव हर महीने दो दिन के लिए झारखंड जाएंगे. 

वहीं तेजस्वी यादव के झारखंड दौरे पर जेडीयू ने तंज कसा है. जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा है कि तेजस्वी तो बिहार में प्रवासी नेता प्रतिपक्ष के तौर पर जाने जाते हैं. वो टूरिस्ट के तौर पर बिहार आते हैं. आपदा में भी उनको जनता से कोई मतलब नहीं होता है. ये लोग झारखंड को क्या संभालेंगे. भले ही तेजस्वी यादव ने हर महीने झारखंड जाने का रूटीन बनाया है. पर ये जाने वाले नहीं है. इसके सारे प्लान निश्चित रूप से फ्लॉप होंगे. 


बता दें कि एकीकृत बिहार के जमाने में झारखंड के कुछ खास इलाकों में आरजेडी का खासा प्रभाव रहा है. पर झारखंड बनने के 21 साल बाद आरजेडी का सिर्फ एक ही विधायक है. सो वर्तमान को संवारने और भविष्य की राजनीति में जोरदार वापसी की रणनीति पर झारखंड आरजेडी ने काम करना शुरू कर दिया है. जिसके तहत आरजेडी ने गांव–गांव तक संगठन निर्माण का खाका तैयार किया है. पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए नए तेवर के साथ संगठन को खड़ा करने की योजना है. मौजूदा में आरजेडी का एक विधायक झारखंड विधानसभा में मौजूद हैं. गठबंधन के तहत पार्टी के विधायक को राज्‍य सरकार में मंत्री पद प्राप्‍त है. पार्टी के जनाधार वाले विधानसभा क्षेत्रों में संगठन की मजबूती का लाभ पार्टी को आने वाले चुनाव में मिल सकता है. इसके अलावा राज्‍य की सत्‍ता में भागीदारी भी इसी अनुपात में सुनिश्चिति हो सकेगी. 

दरअसल, झारखंड के कुछ खास जिलों में आज भी आरजेडी के लिए अपार संभावनाएं है. गढ़वा , पलामू , चतरा, कोडरमा, देवघर, गोड्डा जैसे जिलों में आरजेडी वापसी कर सकती है. बिहार से सटे जिलों में आरजेडी की पकड़ पहले भी मजबूत रही है. आरजेडी के इस निर्णय को राजनीतिक तौर पर गठबंधन के अंदर अपनी दावेदारी को समय के साथ मजबूत करना भी है. इस बार आरजेडी के राजनीतिक समीकरण में यादव – मुस्लिम के साथ पिछड़ा वर्ग भी है. अगर आरजेडी पिछड़ा वर्ग के एक हिस्से को अपने साथ लाने में कामयाब हुई , तो इसका सीधा नुकसान बीजेपी को और इसका लाभ आरजेडी को हो सकता है. वैसे मुस्लिम वोट बैंक में कांग्रेस और जेएमएम की सेंधमारी भी कम नहीं है. यानि गठबंधन मजबूत रहा तो सबका भला होगा और अगर बिखर गए तो बीजेपी को फायदा मिलना तय है

Find Us on Facebook

Trending News