जिन एंबुलेंस को सीएम ने हरी झंडी दिखाकर किया था रवाना, उनका नहीं हो रहा प्रयोग, खुद मुख्यमंत्री के जिले का है यह हाल, कारण हैरान करनेवाला

जिन एंबुलेंस को सीएम ने हरी झंडी दिखाकर किया था रवाना, उनका नहीं हो रहा प्रयोग, खुद मुख्यमंत्री के जिले का है यह हाल, कारण हैरान करनेवाला

BIHAR SHARIF : बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा कुछ दिन पहले प्रदेश मे विभिन्न अस्पतालों के लिए 500 एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाई दी गई थी। इनमें से 19 एंबुलेंस मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा को भी मिले थे। लेकिन इन एंबुलेंस का लाभ अभी तक मरीजों को नहीं मिल पा रहा है और सारी गाड़ियां बिहार शरीफ के सदर अस्पताल में यूं ही खड़ी है। 

जब इन गाड़ियों के इस्तेमाल नहीं होने के बारे में पता किया गया तो यह बात सामने आई कि जिलों को गाड़ियां तो दे दी गई, लेकिन इनके न तो रजिस्ट्रेशन के कागजात दिए गए और न ही इंश्योरेस के दस्तावेज सौंपे गए। एग्रीमेंट पेपर पर सिर्फ रजिस्ट्रेशन नम्बर, चेचिस नम्बर दर्शाया गया है लेकिन कागजात नहीं दिया गया है। जिसके कारण आज तक किसी अनुमंडलीय अस्पताल या पीएचसी को यह उपलब्ध नहीं करायी गयी है। लोग इसका लाभ उठाने से वंचित हैं। । हालांकि सीएस डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा सभी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सदर अस्पताल को चार एम्बुलेंस दिया जाएगा।

दुर्घटना के बाद हो सकती है दिक्कत

अस्पताल में काम करनेवाले कुछ लोगों की मानें तो पिछली बार भी बिना दस्तावेज के एंबुलेंस दिया गया था। नतीजा यह हुआ कि दुर्घटना होने पर थाना में ही एम्बुलेंस काफी दिनों तक खड़ा सड़ रहा है।  इस बार अाधा अधुरा कागजात के साथ उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में अगर कहीं दुर्घटना होती है तो गाड़ी के साथ-साथ चालकों को भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में अब विभाग पिछली बार की गलतियों को दोहराना नहीं चाहता है। बिना इंश्योरेंस और दस्तावेज उपलब्ध कराए गए विभाग इन गाड़ियों को सड़क पर नहीं उतारना चाहती।

9 बेसिक और 10 एडवांस एम्बुलेंस

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला को 19 एम्बुलेंस उपलब्ध करायी गयी है। जिसमें 9 बेसिक और 10 एडवांस एम्बुलेंस है। बेसिक एम्बुलेंस में भी प्राथमिक उपचार से संबंधित सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध है। वहीं एडवांस एम्बुलेंस अत्याधुनिक सुविधाओं से पूरी तरह सुसज्जित है। इसमें आवश्यक दवाओं समेत 52 प्रकार के छोटे-बड़े यंत्र दिए गए हैं। ताकि किसी भी प्रकार के गंभीर मरीज को प्राथमिक उपचार कर विम्स या पटना तक ले जाया जा सके। यह एक प्रकार का चलता फिरता छोटा ओटी ही है।

मुख्यमंत्री के जिले का यह हाल तो..

जब मुख्यमंत्री के जिले का यह हाल तो समझा जा सकता है कि प्रदेश के बाकि जिलों में जो एंबुलेंस उपलब्ध कराए गए हैं. उनके क्या होंगे। अब सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री से इन एंबुलेंस को हरी झंडी दिखवाई तो अब दस्तावेज क्यों नहीं दिए गए। जबकि बिना दस्तावेज के कोई भी गाड़ी सड़क पर चलाना कानूनन गलत है।


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