द दलाई लामा सेंटर फॉर तिब्बतन एंड इंडियन एंशियंट विजडम का हुआ शिलान्यास, 4 भाषाओं में होगी पढ़ाई और रिसर्च

द दलाई लामा सेंटर फॉर तिब्बतन एंड इंडियन एंशियंट विजडम का हुआ शिलान्यास, 4 भाषाओं में होगी पढ़ाई और रिसर्च

GAYA : बौद्ध धर्म गुरु दलाईलामा ने आज 10 बजे "द दलाई लामा सेंटर फॉर तिब्बतन एंड इंडियन एंशियंट विजडम  रिमोट के माध्यम से  शिलान्यास किया,इस शिलान्यास समारोह में बिहार के कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत,पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी,कानून मंत्री किरण रिजजू भी शरिक हुए। 

वहीं शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान दलाई लामा ने प्रवचन देते हुए कहा इंसान को ईष्र्या और घमंड नहीं करनी चाहिए,इंसान का  मन में शांति नहीं है और अन्दर क्रोध है उससे शरीर को नुकसान  पहुंचाता है। दलाई लामा ने कहा क्रोध जब भी उत्पन होता है वो ईर्ष्या और घमंड की वजह से होता है। मन में शांति रखनी चाहिए। दलाई लामा ने  भारत देश के बारे में बताया ये अहिंसा के रास्ते पर चलने वाली और मानने वाला देश है।आप जिस भी धर्म को मानते है। भारत एक धर्मनिरेक्ष देश है। 

दलाई लामा ने कहा तिब्बती अपने आप को खुश नसीब मानते है जो भारत के शरणार्थी है। उन्होंने कहा मेंरे पास बहुत कुछ कहने को नहीं है राज्य और केंद्र सरकार के द्वारा मदद दिया गया उसके लिए मैं धन्यवाद देते हैं।

यह विधा केंद्र बोधगया के दुमोहन स्थित मैत्रिया प्रोजेक्ट कि भूमि पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एक महाविद्यालय  है। तिब्बती मठ के मुख्य आम्जे लामा का कहना है कि इस विश्वस्तरीय इंस्टीट्यूट में भारतीय मनोविज्ञान और बौद्ध धर्म से जुड़े विषयों पर शोध व अध्ययन होंगे। यहां मुख्य रूप से इंडियन फिलॉस्फी, लॉजिक, मनोविज्ञान और 14वें दलाई लामा के चार सिद्धांतों- ह्यूमन वैल्यू, रीलिजियस हार्मोनी, तिब्बत और रिवाइवल ऑफ एंशियंट इंडियन विजडम से जुड़े विषयों की पढ़ाई की सुविधा होगी। साथ ही भारत की प्राचीन विद्या का अध्ययन कराया जाएगा।

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