शिक्षकों के अधिसूचित सेवा शर्त नियमावली की खूबियों और खामियों का होना चाहिए विश्लेषण : केदार पांडेय

शिक्षकों के अधिसूचित सेवा शर्त नियमावली की खूबियों और खामियों का होना चाहिए विश्लेषण : केदार पांडेय

Patna : बिहार जिला परिषद् एव नगर निकाय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय सेवाशर्त नियमावली -2020 विषयक परिचर्चा ( वेबिनार)का आयोजन सारण जिला के उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के साथ गूगल मीट के माध्यम  से आयोजित हुआ जिसमें बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पांडेय मुख्य वक्ता थे। साथ  ही प्राच्य प्रभा के प्रधान संपादक विजय कुमार सिंह और बिहार शिक्षक परिषद के सचिव शशि भूषण दुबे भी सेवा शर्त नियमावली के विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमंडलीय सचिव चंद्रमा सिंह ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ परीक्षा सचिव विद्यासागर विद्यार्थी के स्वागत भाषण के द्वारा हुआ। विषय प्रवेश वरिष्ठ शिक्षक नेता चूल्हन प्रसाद सिंह एवं पूर्व अनुमंडल सचिव नागेंद्र प्रसाद सिंह के द्वारा कराया गया। 

वेबीनार में शिक्षकों को संबोधित करते हुए बीएसटीए प्रमुख पांडेय ने कहा कि हाल ही में अधिसूचित सेवा शर्त नियमावली की खूबियों और खामियों का विश्लेषण होना चाहिए। वर्षों से संगठन के द्वारा स्थानीय निकाय के द्वारा नियुक्त शिक्षकों के लिए विहित वेतनमान और सेवाशर्त लागू करने की मांग विभिन्न मंचों से की जाती रही है। 

उन्होंने कहा कि बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव के रूप में मेरे द्वारा पटना उच्च न्यायालय में इस संबंध में सबसे पहले 2009 में मुकदमा भी दायर किया गया, जिसमें अक्टूबर 2017 में हमें कामयाबी मिली। विधानपरिषद्  में मेरे ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सरकार का यह आश्वासन था कि पटना उच्च न्यायालय का जो भी न्याय निर्णय होगा उसे  हम लागू करेंगे। लेकिन राज्य सरकार के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर किया गया और उसमें जो न्याय निर्णय 2019 में आया वह शिक्षकों के विरुद्ध गया। बावजूद इसके हम सभी ने चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत की और अनिश्चितकालीन विद्यालयों में तालाबंदी भी हुई। 

केदार पांडेय ने कहा कि जब आंदोलन अपने चरम पर था सरकार दबाव में थी, लेकिन तभी कोरोना रूपी विश्वव्यापी महामारी के चपेट में हमारा हड़ताल आ गया। लॉकडाउन में हमारा हड़ताल असरहीन हो गया था। 70 से अधिक शिक्षक आर्थिक कठिनाइयों एवं सरकार के दमनात्मक कार्रवाईयों को सहन नहीं कर सके और अकाल मौत के गाल में समा गए। ऐसी परिस्थिति में भारी मन से हड़ताल को स्थगित किया गया। सरकार ने वादा किया कि जब स्थिति सामान्य होगी तो सभी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा। लेकिन दिन -प्रतिदिन कोरोना का कहर बढ़ता गया। आज भी स्थिति बहुत ही विकराल है। फिर भी माध्यमिक शिक्षक संघ ने सरकार से संवाद जारी रखा। 

उन्होंने कहा कि सरकार पर कोरोणा के कारण पूरा दबाव नहीं बन पा रहा था। फिर भी शिक्षकों के लिए सेवा शर्त नियमावली 2020 अधिसूचित हुई। शिक्षकों के वेतन में 15% की वृद्धि 1 अप्रैल 2021   करने का भी संकल्प  जारी हुआ है। यदि वेतन में 35 से 40% की वृद्धि होती तो हम level-7 और level-8 पर पहुंच जाते हैं। जो सेवा शर्त नियमावली आई है उसमें नियोजन इकाई से बाहर दूसरे नियोजन इकाई एवं दूसरे जिले में भी स्थानांतरण की सुविधा महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों को मिली है। सैकड़ों  शिक्षक सेवाकाल में दिवंगत हो गए उनके परिवार के लिए अनुकंपा की नौकरी शिक्षक की योग्यता के अभाव में नहीं मिल पा रहा था अब उन्हें इस सेवा शर्त मैं यह सुविधा लिपिक और परिचारी पद के रूप में मिल सकेगा। जिससे बहुत ही राहत महसूस कर रहे हैं। पुरूष शिक्षकों को पारस्परिक स्थानांतरण की सुविधा हमें मंजूर नहीं है। माध्यमिक शिक्षकों का उच्च माध्यमिक शिक्षक में 50% सीटों पर प्रोन्नति , स्नातकोत्तर प्रशिक्षित  माध्यमिक शिक्षकों को 10 वर्ष की सेवा एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों को 6 वर्ष की सेवा उपरांत प्रधानाध्यापक में प्रोन्नति से विद्यालयों का प्रबंधन सुचारू रूप से हो सकेगा। 

केदार पांडेय ने कहा कि शिक्षक संघ का मांग है कि 10 ,20 और 30 वर्षों की सेवा पूरी करने  पर एसीपी का लाभ सभी शिक्षकों एवं पुस्तकालय अध्यक्षों को मिलनी चाहिए। अर्जित अवकाश जो एक 11 दिन वार्षिक और 120दिन संचयी दिया गया है उसे पुराने शिक्षकों के समान दिया जाए। सेवा निरंतरता का लाभ देने की जो बात सेवा शर्त में की गई है उसे भूतलक्षी प्रभाव से  दिया जाए। मातृका अवकाश 180 दिन और पितृकावकाश 15 दिन  का प्रावधान है, लेकिन चिकित्सा अवकाश जो 120 दिन है उसे 180 दिन होनी चाहिए। अध्ययन अवकाश 7 वर्षों की सेवा को बदलकर 3 वर्ष किया गया है। विद्यालय में उप प्रधान अध्यापक का पद सृजित करने की मांग भी शिक्षक संघ के द्वारा किया गया था। जो भी मांगे हमारी अधूरी रह गई हैं उसके लिए शिक्षकों की एकजुटता, संघ की संगठन शक्ति को ध्यान में रखते हुए निकट भविष्य में रणनीति बनाकर प्रभावी आंदोलन किया जाएगा।  

इस वेबीनार में राजेंद्र प्रसाद सिंह, नागेंद्र प्रसाद सिंह, विजय सिंह ठाकुर,सदर अनुमंडल सचिव सुजीत कुमार, डॉक्टर सत्येंद्र पांडेय, अनवारूल हक, रईस उल एहरा खान, डॉ विनोद कुमार सिंह, प्रकाश कुमार सिंह, डॉ रमेंद्र प्रसाद, राज कुमार सिंह , उत्तम कुमार, राजीव कुमार शर्मा, अरुण मिश्रा, डॉ रजनीश,  श्याम तिवारी डॉक्टर दीनबंधु, सुनील कुमार, दिलीप कुमार, मनोज कुमार, सतीश कुमार, स्नेहलता,पल्लवी प्रिया, भाग्यश्री, सुनीता कुमारी, तृप्ति कुमारी,ध्रुवदेव सिंह आदि ने अपने विचार व्यक्त किया। वेबिनार का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन कुमार अर्णज ने किया।

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