जिस स्टेशन को घाटे में बताकर रेलवे कर रहा था बंद, उसे ग्रामीणों ने कुशल संचालन से पहुंचा दिया मुनाफे में, जानिए इस बदलाव की पूरी कहानी

जिस स्टेशन को घाटे में बताकर रेलवे कर रहा था बंद, उसे ग्रामीणों ने कुशल संचालन से पहुंचा दिया मुनाफे में, जानिए इस बदलाव की पूरी कहानी

DESK : भारतीय रेलवे देश में सबसे ज्यादा रोजगार देता है। रेलवे छह हजार से ज्यादा स्टेशनों का संचालन करता है। इन सबके बाद राजस्थान में एक रेलवे स्टेशन ऐसा भी है, जिसके संचालन का पूरा जिम्मा गांववालो ने उठा रखा है। ग्रामीणों द्वारा ही यहां टिकट बेचने के लिए स्टाफ भी रखा गया है, जिसकी सैलरी भी गांववाले ही देते हैं। आज स्थिति यह है कि ग्रामीणों की मेहनत के कारण यह रेलवे स्टेशन मुनाफे में चल रहा है।

ग्रामीणों द्वारा संचालित यह रेलवे स्टेशन राजस्थान के नागौर जिले में हैं, जहां जालसू नानक हाल्ट रेलवे स्टेशन (Jalsu nanak halt Railway station) संभवत: देश का इकलौता स्टेशन है, जिसे ग्रामीणों ने चंदा कर न सिर्फ चलाया, बल्कि मुनाफे में भी ले आए। भारतीय रेलवे (Indian Railways) को जालसू नानक हाल्ट रेलवे स्टेशन से हर महीने 30 हजार रुपये की आमदनीभी हो रही है

जिद ने बदली स्थिति

जिस हॉल्ट को आज मुनाफे में बताया जा रहा है। डेढ़ दशक पहले स्थिति इसके विपरीत थी। बताया गया कि 2005 रेलवे को एक पॉलिसी के तहत जोधपुर रेल मंडल में कम रेवेन्यू वाले स्टेशन को बंद करना था। इसमें जालसू नानक हाल्ट स्टेशन भी शामिल था। लेकिन, यहां के ग्रामीणों ने रेलवे का फैसले के विरोध में आंदोलन शुरू कर दिया। 11 दिन तक यहां धरना चला. रेलवे ने इस स्टेशन को दोबारा शुरू करने के लिए शर्त रखी कि ग्रामीण इस रेलवे स्टेशन को चलाएंगे। इसके साथ ही उन्हें हर महीने 1500 टिकट और प्रतिदिन 50 टिकट बेचने होंगे. इसे ग्रामीणों ने मान लिया और तभी से इसकी बागडोर यहां के ग्रामीण संभाल रहे हैं।

चंदे की रकम से खरीदी थी रेलवे के टिकट

ग्रामीणों के मुताबिक स्टेशन चालू करने की रेलवे की शर्त को पूरा करने के लिए ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाई और हर घर से चंदा जुटाया. चंदे से जुटाए गए डेढ़ लाख रुपयों से 1500 टिकट भी खरीदे गए और बाकी बचे रुपये को ब्याज के तौर पर इनवेस्ट किया। शुरुआती दौर में आय कम थी, लेकिन गांव के लोगों ने इसके बाद भी इसे जारी रखा. आज हर महीने 30 हजार रुपयेसे ज्यादा आय इस स्टेशन से हो रही है. यहां 10 से ज्यादा ट्रेन रुकती हैं. अब ग्रामीण हर महीने 30 हजार के टिकट रेलवे से खरीदते हैं। इसके बाद 5 हजार रुपये की सैलरी पर एक ग्रामीण को ही टिकट बिक्री के लिए स्टेशन पर बैठाया गया. बिक्री से मिलने वाले कमीशन और ब्याज के रुपयों से उसे मानदेय दिया जाता हैं।

फौजियों का गांव है जालसू

दरअसल, जालसू फौजियों का गांव है, यहां हर दूसरे घर में एक फौजी है. वर्तमान में 200 से ज्यादा बेटे सेना,  बीएसएफ, नेवी, एयरफोर्स और सीआरपीएफ में हैं. जबकि 250 से ज्यादा रिटायर फौजी हैं. करीब 45 साल पहले 1976 में इन्ही फौजियों व इनके परिवारों के आवागमन के लिए रेलवे ने यहां हाल्ट स्टेशन शुरू किया गया था।

रेलवे से फिर हैंडओवर लेने की उठी मांग

अब जब इस हॉल्ट को ग्रामीण मुनाफे में चला रहे हैं। ऐसे में अब इस बात की मांग हो रही है कि रेलवे इसे वापस हैंडओवर ले ले। बताया जा रहा है कि एक दिन पहले रेलवे के अधिकारियों ने गांव का दौरा भी किया था। 

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