15 साल से चल रहे इस सरकारी स्कूल को आज तक नहीं मिला अपना भवन, तबेले में होता है संचालन, शौच करने के लिए घर जाते हैं 200 बच्चे

15 साल से चल रहे इस सरकारी स्कूल को आज तक नहीं मिला अपना भवन, तबेले में होता है संचालन,  शौच करने के लिए घर जाते हैं 200 बच्चे

KATIHAR : बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं। खासकर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की दुर्दशा कैसी है, यह किसी से छिपी नहीं है। सरकार भले ही कई दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था तबेले से संचालित हो रहा है। तबेले के ऊपर एक टीने के एस्बेस्टस लगाकर स्कूल का संचालन किया जा रहा है। लेकिन इसे सुधारने की कोई पहल नहीं की गई।

कटिहार नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर दो प्राथमिक विद्यालय न्यू कॉलोनी, गौशाला के इस तस्वीर को देखकर आप कुछ ऐसा ही कहेंगे कि आखिर शहरी इलाके में नगर निगम द्वारा संचालित लगभग 200 छात्र- छात्राओं को पठन-पाठन वाले इस विद्यालय के आखिर ऐसा हालात क्यों है जहां मूलभूत सुविधाओं के नाम पर बच्चों को न तो शुद्ध पानी मिलता है और न ही विद्यालय में शौचालय की व्यवस्था है। बेंच डेस्क के नाम पर अब भी बोरा कल्चर ही है।

 इस हालात पर विद्यालय के शिक्षकाओ का कहना है कि लगभग 15 साल से इसी हालात में विद्यालय चल रहा है, कई बार विद्यालय के जमीन से जुड़ी की समस्या निदान करने का कई बड़े स्तर पर भी आश्वासन मिला है मगर नतीजा अब तक सीफर है। यहां पढ़ा रही शिक्षिका ने बताया अपना भवन नहीं होने के कारण कई प्रकार की समस्या होती है। एस्बेस्टस का छत लगाने के लिए सभी शिक्षकों ने चंदा किया, तब जाकर यह लग सका है।

शौचालय के लिए घर जाते हैं बच्चे

इस स्कूल में पढ़नेवाले बच्चों के लिए एक अदद शौचालय तक नहीं है। जब किसी बच्चे को शौच जाना होता है, तो वह पढ़ाई छोड़कर अपने घर चला जाता है। वहीं जब NEWS4NATION की टीम ने पूछा तो एक बच्ची ने बताया कि उसे स्टील के स्कूल में पढ़ना अच्छा नहीं लगता है, यहा बहुत गर्मी लगता है। दूसरे बच्ची ने शौचालय की समस्या बताई।

उधर अभिभावक कहते हैं अन्य प्राथमिक विद्यालय इस इलाके से दूर में है ऐसे में छोटे बच्चों को दूर के विद्यालय में भेजना संभव नहीं है जबकि विद्यालय से जुड़े छात्र-छात्रा  जल्द इस विद्यालय कायाकल्प के मांग कर रहे हैं।

जमीन की समस्या 

बताया गया कि जिस जगह स्कूल संचालित हो रही है, वह निजी है। लेकिन इस जमीन के मालिकों ने स्कूल के नाम पर सरकार को यह जमीन दान में दे दी है। सारे कागजी दस्तावेज भी पूरे कर लिए गए हैं। लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन और जिला शिक्षा विभाग ने जमीन पर अपना भवन बनाने की पहल नहीं की। 


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