औरंगाबाद में ग्रामीण कार्य विभाग का अनोखा कारनामा, लेबुरा के बदले नेउरा पहुँच गयी सड़क

औरंगाबाद में ग्रामीण कार्य विभाग का अनोखा कारनामा, लेबुरा के बदले नेउरा पहुँच गयी सड़क

AURANGABAD : अनजान राहगीर जानकारी के अभाव में राह भटक जाता है। लेकिन कोई सड़क रास्ता भटक जाएं और अपने गंतव्य के बजाय किसी और गांव तक पहुंच जाए तो इसका दोष किसे देंगे। सीधा जवाब होगा कि यह तो सड़क बनाने वाले विभाग की गलती ही नही महागलती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण में ऐसी गलती की है औरंगाबाद के ग्रामीण कार्य विभाग संख्या-1 ने।


मामला कुटुम्बा प्रखंड के घेउरा पंचायत से जुड़ा है। इस पंचायत में सरकारी रिकार्ड में लेबुरा गांव जाने के लिए सड़क तो बनी। लेकिन कमाल तो यह हो गया कि राह भटक कर यह रोड लेबुरा के बदले नेउरा पहुंच गयी। ऐसा काम करने वाले विभाग को दाद तो देनी ही पड़ेगी। साथ ही शाबासी भी देनी पड़ेगी कि क्या कमाल का विभाग है और बड़ा अच्छा कमाल किया है। हद तो यह है कि यह सड़क जिस गांव लेबुरा के नाम पर बनी, वह गांव घेउरा पंचायत में है ही नहीं बल्कि यह गांव इस पंचायत से 10 किलोमीटर दूर महाराजगंज पंचायत में है। घेउरा पंचायत में इस सड़क को सिमरा पथ से लेबुरा रोड के नाम से बनाया गया है। यह पथ खैरा नहर तटबंध से होते हुए नेउरा गांव तक जाती है। वही वास्तविकता यह है कि सरकारी रिकार्ड में इस पथ को लेबुरा गांव के लिए बनाया गया है। ऐसे में इस पथ को लेबुरा जाना चाहिए था। लेकिन यह सड़क नेउरा पहुंच गई। यह सड़क उस नेउरा गांव में पहुंची, जहां जाने के लिए पहले से ही सड़क मौजूद है। इस कथित लेबुरा पथ का कोई उपयोग भी नहीं करता है। कभी-कभार ग्रामीण इस सड़क का उपयोग किया करते हैं। मतलब सड़क को राह भटका कर बनाया गया और जनता का पैसा बेवजह बर्बाद कर दिया गया। हालांकि इसी घेउरा पंचायत में दो ऐसे गांव भी हैं, जहां सड़क नहीं है। 

ग्रामीण सड़क के लिए सरकारी दफ्तरों और नेताओं का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हे सड़क नसीब नहीं है। घेउरा पंचायत में दो गांव सड़क के लिए दशकों से तड़प रहे है। इसके बावजूद न तो इस ओर सरकारी विभाग की नजरे इनायत हो रही है और न ही जन प्रतिनिधियों की। इतना ही नही सड़क का लगा बोर्ड अपने आप में अलग सवाल है। एनएच 139 से सिमरा जाने वाली मुख्य पथ से लेबुरा पथ का निर्माण कराया गया है। लेबुरा पथ सिमरा पथ से खैरा होते हुए नेउरा गांव तक गई है। इस सड़क का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा कराया गया है। सड़क निर्माण के बोर्ड पर लेबुरा पथ की दूरी 1.6 किलोमीटर दर्ज है। इसी बोर्ड के नीचे लेबुरा सड़क का माइल स्टोन लगाया गया है। 

उसपर दूरी 0.6 किमी दर्ज है। यह अपने आप में एक बड़ी साजिश और गड़बड़ी की ओर ईशारा करता है। बोर्ड पर राशि तक दर्ज नहीं है। हालांकि इस सड़क पर ग्रामीणों ने अबतक इसलिए आपत्ति दर्ज नहीं कराई। क्योंकि किसी को से इस सड़क से कोई खास मतलब नहीं है और न ही इस नाम का कोई पंचायत में गांव है। वैसे लेबुरा पथ का बोर्ड देखकर गांव के अतिथि कई बार रास्ता भटकने लगते हैं। राह भटकने पर उन्हे मोबाइल पर रिश्तेदारों से संपर्क करना पड़ता हैं। वे पूछते है कि हम लेबुरा पथ में हैं। कैसे आना हैं? फिर ग्रामीण रिश्तेदारों को बताते हैं कि लेबुरा गलती से लिखा हुआ है। आप सही जगह पर हैं और फिर पता बताते हैं, तब जाकर अतिथि सही जगह पहुंच पाते है। हालंकि कुछ लोगों ने नाम नही छापने के शर्त पर कहा कि अधिकारियों ने जान बुझकर इस सड़क को भटकाया है। घटिया निर्माण कर पैसे हजम किये गये है। जबकि विभाग का इससे साफ इनकार है। जानकार सूत्रों का कहना है कि कुटुम्बा प्रखंड में इस तरह के कारनामों को ग्रामीण कार्य विभाग ने बखूबी अंजाम दिया है। विभाग के लिए यह धरती उपजाउ है। पहले भी इसी इलाके में एक सड़क को अगवा किया गया था। यानी लभरी खुर्द के नाम से बनी सड़क लभरी पहुंचने के बजाय लभरी गांव पहुंच गई थी। जबकि लभरी में पहले से सड़क सुविधा उपलब्ध थी। लभरी खुर्द को आज तक सड़क नसीब नहीं है। रसूखदारों ने दूसरे गांव को जाने वाली सड़क का निर्माण अपने गांव में करा लिया था। उस वक्त विभाग ने जांच कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन आज तक इस मामले में कोई जांच अभी तक नहीं हुई है। कुटुम्बा प्रखंड के घेउरा पंचायत में दो ऐसे गांव हैं। जिन्हें सड़क आज तक नसीब नहीं हुआ। खैरा हरनौत गांव में भी सड़क सुविधा नहीं है। बरसात में भगवान भरोसे इस गांव के लोग रहते हैं। बीमार पड़ने पर खाट एंबुलेंस ही सहारा होता है। लोकसभा चुनाव में सड़क की मांग को लेकर यहां के लोगो ने वोट बहिष्कार भी किया था। प्रशासन से उस वक्त आश्वासन मिला। लेकिन आज तक सड़क नहीं बनी। अगर चांदखाप गांव के पास 500 मीटर पक्की सड़क बना दिया जाए तो यह गांव सड़क से जुड़ जाएगा। इसी तरह लभरी खुर्द गांव में पक्की सड़क नहीं है। पगडंडी से होकर लोग शहर जाते हैं। गांव के बाहर बतरे नदी है। बरसात में तो यह गांव शहर से कट जाता है। इस गांव में सड़क और नदी पर पुल की दशकों से जरूरत है। इस मांग को लेकर ग्रामीण सरकारी दफ्तर और नेताओं के दरबार में अपनी फरियाद लेकर घूम रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी ने सुना नहीं है। इस मामले में पूछे जाने पर ग्रामीण कार्य विभाग संख्या-1 के कार्यपालक अभियंता योगेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएंगी। दोषियों पर कार्रवाई होगी। जिन गांवों में सड़क नही है, वहां सड़क का निर्माण कराया जाएगा।

औरंगाबाद से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट 


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