उपेंद्र कुशवाहा ने सीएम नीतीश कुमार से की बड़ी मांग, पटना में चाहते हैं इस जगह हो खुदाई... केंद्र सरकार को लिखा पत्र

उपेंद्र कुशवाहा ने सीएम नीतीश कुमार से की बड़ी मांग, पटना में चाहते हैं इस जगह हो खुदाई... केंद्र सरकार को लिखा पत्र

पटना.  राष्ट्रीय लोक जनता दल के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने  बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से एक बड़ी मांग कर दी. वे चाहते हैं कि पटना और बिहार के इतिहास को लेकर राज्य सरकार पुरातन अतीत को उजागर करने के लिए खुदाई कराए. यह खुदाई पटना के कुम्हरार पार्क की हो. इसे लेकर उन्होंने केंद्र सरकार को भी पत्र लिखा है. केंद्र सरकार को पत्र लिखते हुए कहा कि कुम्हरार पार्क  को खुदाई कर पुराने तत्वों को उजागर करें.

उपेंद्र कुशवाहा आगे कहा कि 2004 में आर्कियोलॉजिकल ने ने खुदाई किया था लेकिन कुछ कारण बस रुक गई. उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार सरकार इस पर ध्यान दें क्योंकि बिहार में ऐसे कई जगह है जहां पर पुराने इतिहास अभी भी उजागर है जिसका जरूरत है कि सरकार खुदाई करवा कर उन चीजों को जनता के बीच लाए. बता दे कि तेजस्वी यादव अभी पर्यटन का बढ़ावा देने के लिए जापान दौर पर है और वहीं से वह कह रहे हैं कि बिहार में पर्यटन का क्षेत्र है सभी लोगों को निमंत्रण दे रहे हैं कि लोग यहां आए.

उन्होंने लिखा है कि बिहार की राजधानी पटना के कुम्हरार में वर्षों से उपेक्षित रहे सम्राट अशोक के महल और उसके भग्नावशेषों के संरक्षण के हित में माननीय के मंत्रालय द्वारा किए गए ताजा प्रयासों का संज्ञान लेते हुए और इसे एक ऐतिहासिक फैसला मानते हुए राष्ट्रीय लोक जनता दल तहे दिल से इसका स्वागत करता है। पटना के जिस इलाके में माना जाता है कि वहां सम्राट अशोक का महल था, उसके विकास और संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) ने हेरिटेज उपनियमों का एक मसौदा जारी किया है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह संस्कृति मंत्रालय के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है और यह काम माननीय के नेतृत्व में निष्पादित किया गया है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री अर्जुन राम मेघवाल  उन्होंने पत्र में लिखा है कि आपके मंत्रालय का यह फैसला सम्राट अशोक की विश्व के पटल पर न केवल गौरवान्वित करने का काम करेगा, बल्कि यह अजातशत्रु, चंद्रगुप्त और सम्राट अशोक की प्राचीन राजधानी को देखने, समझने का एक व्यापक दृष्टिकोण भी सामने लाएगा। इससे हमारे स्वर्णिम अतीत का गौरव और निखार कर दुनिया के सामने आएगा। आपके नेतृत्व में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय का यह ऐतिहासिक कदम सम्राट अशोक की दार्शनिक विरासत को न केवल पुनर्जीवित करता है, बल्कि दुनिया के समकालीन शासकों को भारतीय राज प्रणाली की ऐतिहासिक दार्शनिकता से अवगत कराने का काम भी करता है।

अब जब राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) ने इस दिशा में व्यापक दृष्टिकोण वाला यह कदम उठाया है, तो निश्चित तौर पर दुनिया को अशोक महल के उत्खनन अवशेष को जानने समझने का व्यापक नजरिया मिलेगा, जो पाटलिपुत्र के गौरवशाली इतिहास के जीवित संकेत हैं। इस संदर्भ में सूचनार्थ यह बताना चाहूंगा कि स्वतंत्र भारत में एनडीए से पहले की सरकारों ने सम्राट अशोक की विरासत को समझने की दिशा में कभी भी उत्साहपूर्वक कोई कदम उठाने का काम नहीं किया था। कुम्हरार में 1912-14 के दौरान डॉ. नूपर द्वारा स्तभ वेदिका की खोज की गई। उसके बाद 1951 से 1955 के बीच केपी जायसवाल अनुसंधान संस्थान ने वहां उत्खनन किया। इस उत्खनन में मौर्यकाल से 600 ईसवी तक के पुरातात्विक स्थलों के सांस्कृतिक अनुक्रम का पता चला था। इस खुदाई में आठ और आधार मिले थे। इस तरह से 80 स्तंभ वाले सभागार का अस्तित्व सामने आया।

परन्तु किन्हीं कारणों से 2004 में इस पुरातात्विक स्थल पर कथित रूप से जलजमाव के कारण यथास्थिति में छोड़ दिया गया। इससे देश और दुनिया प्राचीन मौर्यकाल और अशोक महल के गौरवशाली इतिहास से वंचित रहने को अभिशप्त हो गई। अतः आपसे आग्रह होगा कि करीब 70 सालों से बंद उत्खनन कार्य को पुनः प्रारंभ किया जाए, ताकि जल्द से जल्द पाटलिपुत्र और सम्राट अशोक की गौरवशाली विरासत को विस्तृत रूप से दुनिया के सामने लाया जा सके । इस कार्य से बिहार में पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बेरोजगार नौजवानों के लिए रोजगार का नया द्वार भी खुल सकेगा| 

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