यूरिया के लिए मारामारी , सरकारी केंद्रों पर लग रही किसानों की लंबी कतार, काला बजारी करनेवाले भी सक्रिय

यूरिया के लिए मारामारी , सरकारी केंद्रों पर लग रही किसानों की लंबी कतार, काला बजारी करनेवाले भी सक्रिय

कैमूर। जिले में खाद का हाहाकार इस कदर मचा है कि कोरोना काल में भी लोग एक दूसरे को धक्का देते हुए घंटों सरकारी दर पर खाद पाने के लिए लाइन में खड़े दिख रहे हैं। कुछ केंद्रों पर तो खाद के लिए हंगामा भी हो गया। खाद का आवंटन कम आने के कारण किसानों को काफी परेशानी हो रहा है। सरकार किसानों की आय दोगुना करने और सभी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दावा तो करती है लेकिन खेती के टाइम में खाद नहीं मिलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। कैमूर जिले में यूरिया का किल्लत बहुत ज्यादा है। यूरिया ब्लैक में तीन सौ बीस रुपये प्रति बोरी मिल रहा है और वही सरकारी दर में 266 रुपये पचास पैसे में मिल रहा है। किसान सरकारी गोदाम पर बीस दिनों से चक्कर लगा रहे हैं। 

वहीं मोहनिया के बिस्कोमान भवन पर एक हजार बोरा खाद तो आया लेकिन खाद आते ही लोग धक्का-मुक्की करते हुए लाइन में खड़े हो गए। ना सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रहा और ना ही किसी के चेहरे पर मास्क दिखा। यूरिया खाद पाने के लिये किसान अपनी जान भी जोखिम में डालकर खाद पाना चाह रहे हैं। सरकारी गोदाम पर पांच बोड़ा खाद लेने पर एक किलो दवा लेना जरुरी है, इतना किसानों को जानकारी मिलने के बाद मोहनिया गोदाम के पास हंगामा कर दिया । फिर प्रशासनिक हस्तक्षेप कर सब को समझाना पड़ा ।

8 हजार की जगह मिले 1000 बैग उपलब्ध

वही मोहनिया बिस्कोमान गोदाम के प्रभारी बताते हैं 8000 बैग खाद की रिक्वायरमेंट है लेकिन सिर्फ 1000 बैग ही उपलब्ध हुआ है, जिससे खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और 5 बोरी खाद के साथ एक दवा का पैकेट भी दिया जा रहा है जो कि ऊपर से निर्देश है। खाद कम आने से परेशानी हुआ है। वही कैमूर जिला अधिकारी  नवदीप शुक्ला बताते हैं खाद कालाबाजारी की सूचना जहां भी मिलेगा तुरंत कार्रवाई किया जाएगा । 


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