युवती जब किसी के साथ ‘सोती’ है तब भाजपा शासन में मिलती है नौकरी - कांग्रेस के आरोप पर बीजेपी ने खोला राज

युवती जब किसी के साथ ‘सोती’ है तब भाजपा शासन में मिलती है नौकरी - कांग्रेस के आरोप पर बीजेपी ने खोला राज

DESK. नौकरी के लिए लोगों को कितनी मेहनत करनी पड़ती है यह बात किसी से छिपी नहीं है। लेकिन अब कांग्रेस के एक नेता ने जो दावा किया है वह चौकाने वाला है। कांग्रेस नेता ने कहा है कि भाजपा शासन में नौकरी के लिए युवतियों को किसी के साथ सोना पड़ता है और युवक देते हैं रिश्वत। कर्नाटक में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज है। इन सबके बीच कांग्रेस विधायक और पार्टी के प्रवक्ता प्रियांक खड़गे ने भाजपा की नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार पर गंभीर आरोप लगा दिए हैं। 

खड़गे ने साफ तौर पर कहा है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए राज्य में लोगों को रिश्वत देनी पड़ती है। इतना ही नहीं, उन्होंने तो यह भी कह दिया कि सरकारी नौकरियों के लिए लड़कियों को किसी के साथ सोना पड़ता है। प्रियंका ने कहा कि भाजपा सरकार में बिना पैसे दिए नौकरी नहीं मिलेगी। इससे पहले 2 मंत्रियों ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार (राज्य में) में नौकरी पाने के लिए, युवा महिलाओं को किसी के साथ सोना पड़ता है और युवाओं को रिश्वत देनी पड़ती है। यह रिश्वत-सोफे की सरकार बन गई है. इसके साथ ही कांग्रेस नेता ने भर्ती घोटाले की न्यायिक जांच या विशेष जांच दल गठित करने की मांग की है। उन्होंने सरकार से फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बनाने की अपील की है। 


दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के इस आरोप पर पलटवार किया है। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि उन्होंने जो कुछ भी कहा वह कांग्रेस के शासन में हो रहा था - केंद्र और राज्य में। उन्होंने भारत की महिलाओं के बारे में जो कहा वह उन महिलाओं और लड़कियों का अपमान है जो आज हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। उन्हें देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए।

भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) को भंग करने और लोकायुक्त पुलिस शाखा की शक्तियों को बहाल करने के उच्च न्यायालय के फैसले के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि सरकार इस आदेश का पालन करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने 2018 के घोषणापत्र में इसका वादा किया था। उन्होंने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादे को पूरा करने में देरी का कारण मामले का अदालत में लंबित होना बताया तथा कहा कि विधि विभाग और महाधिवक्ता को निर्देश दिया गया है कि वे फैसले के क्रियान्वयन के लिए पूरे आदेश का अध्ययन करें। बोम्मई ने कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, कैबिनेट में इस बारे में अनौपचारिक रूप से चर्चा हुई। हमने एसीबी के बारे में अपने घोषणापत्र में जो कहा था, उसके लिए हम प्रतिबद्ध हैं।


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