43 का फेरा पार करेगा जेडीयू ? सीटिंग सीटें बचाने में CM नीतीश हुए नाकामयाब तो मांझी-सहनी ही कर देंगे खेला!

43 का फेरा पार करेगा जेडीयू ? सीटिंग सीटें बचाने में CM नीतीश हुए नाकामयाब तो मांझी-सहनी ही कर देंगे खेला!

PATNA: बिहार में विधानसभा की दो सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं। दोनों सीटों पर सत्ताधारी जेडीयू की प्रतिष्ठा फंसी हुई है। अगर वोटरों ने गच्चा दिया तो इसका असर सीधे-सीधे नीतीश सरकार पर होगा। क्यों कि सत्ताधारी गठबंधन विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा बड़ी मुश्किल से छू सका है। एनडीए गठबंधन में 4-4 विधायकों वाले दो छोटे दल बार-बार अहसास दिलाते हैं कि हमारी बदौलत ही सरकार टिकी है। ऐसे में दो सीटों पर होने वाले उप चुनाव की काफी अहमियत हो गई है। अगर जेडीयू अपनी सीट बचाने में नाकामयाब होती है तो राजद गठबंधन विधानसभा में और मजबूत होगा और खेला हो जाएगा।   

43 का फेरा पार करेगा जेडीयू?

बिहार विधानसभा की कुशेश्वरस्थान सीट से 2020 में चुनाव जीते जेडीयू विधायक शशिभूषण हजारी व तारापुर से जेडीयू के ही विधायक मेवालाल चौधरी के निधन से खाली सीट पर उप चुनाव हो रहे हैं। 2020 विधानसभा चुनाव में जेडीयू बड़ी मुश्किल से 43 सीटें जीत सकी थी। फिर बसपा व लोजपा के 1-1 विधायकों को पाले में मिलाकर संख्या 45 पर पहुंचाई। चुनाव के थोड़े दिन बाद ही जेडीयू ने बसपा से जीते एक मात्र विधायक जमां खान को दल में शामिल करा लिया और उन्हें मंत्री बना दिया। इसके अलावे लोजपा के एक मात्र विधायक राजकुमार सिंह को भी जेडीयू ने अपने पाले में मिला लिया। लेकिन दो विधायकों के निधन से संख्या फिर से घटकर 43 पर ही पहुंच गई.अगर उप चुनाव में जेडीयू अपनी दोनों सीटिंग सीटें बचाने में कामयाब नहीं हुई तो विधायकों की संख्या 43 पर ही रह जायेगी। लिहाजा सीएम नीतीश की पार्टी जेडीयू के लिए विधानसभा का उप चुनाव काफी अहम हो गया है। अपनी संख्या फिर से 45 पर पहुंचाने के लिए जेडीयू के नेता युद्धस्तर पर लगे हैं।  

तेजस्वी यादव ने झोंकी पूरी ताकत

इधर राजद भी जेडीयू की सीटिंग सीट पर अपनी नजर गड़ाये हुए है। तेजस्वी यादव की पूरी कोशिश है कि इस बार के उप चुनाव में दोनों सीट राजद की झोली में जाए। नेता प्रतिपक्ष ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत लगा दी है। विधायकों की फौज को तारापुर और कुशेश्वरस्थान विस क्षेत्रों में उतारा गया है। पंचायत स्तर पर विधायकों की ड्यूटी लगाई गई है। हालांकि राजद की राह में कांग्रेस रोड़ा बन गई है। कांग्रेस ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार कर तेजस्वी यादव के मुश्किल खड़ी कर दी है। हालांकि तेजस्वी ने तारापुर में बड़ी चाल चली है और वैश्य उम्मीदवार को टिकट देकर जेडीयू को परेशानी में डाल दिया है। एनडीए का आधार वोट वैश्य वोटरों का अगर अपनी जाति के कैंडिडेट यानी राजद के उम्मीदवार अरूण कुमार साह की तरफ झुकाव हुआ तो फिर जेडीयू की मिट्टी पलीद हो सकती है। वैसे बीजेपी-जेडीयू डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटी है।  

आज की तारीख में विधानसभा में दलों की ताकत

बिहार विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 243 है। अगर जेडीयू अपनी दोनों सीट बचाने में नाकामयाब हुई तो विधायकों की संख्या फिर से 43 पर ही रह जाएगी।यानी एनडीए गठबंधन को सीधे-सीधे 2 विधायकों का नुकसान होगा। वर्तमान में राजद सबसे बड़ा दल है और उसके पास 75 विधायक हैं। वहीं बीजेपी के पास 74, जेडीयू-43,कांग्रेस-19,माले-12,एआईएमआईएम-5, हम-4,वीआईपी-4,सीपीाई-2,सीपीएम-2 और निर्दलीय विधायक की संख्या 1 है। आज की तारीख में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए में बीजेपी के 74,जेडीयू 43, वीआईपी-4,हम-4 व एक निर्दलीय विधायक यानी कुल 126 विधायकों का समर्थन है। जबकि विपक्षी विधायकों की कुल संख्या 115 है। 

मांझी-सहनी की होगी बल्ले-बल्ले

एनडीए के दो घटक दल के नेता मांझी-सहनी पर लालू परिवार लगातार डोरे डाल रहा है। दोनों नेता कई बार इसका प्रकटीकरण भी कर चुके हैं। पूर्व सीएम मांझी व मुकेश सहनी अपनी अहमियत का अहसास दिलाने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते। लिहाजा जेडीयू अगर कमजोर होती है तो इसका फायदा लेने से एनडीए के छोटे क्षत्रप बाज नहीं आयेंगे ।  

जानें किस दल के वर्तमान में कितने विधायक

NDA.......बीजेपी-74,जेडीयू-43, हम-4, वीआईपी-4, और निर्दलीय-1=126

महागठबंधन......राजद-75, कांग्रेस-19, माले-12, सीपीआई-2, सीपीएम-2=110 

AIMIM-5.... 


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