'सशक्त बेटी, समृद्ध बिहार: टुवार्ड्स एन्हान्सिंग द वैल्यू ऑफ गर्ल चाइल्ड' विषय पर पटना में कार्यशाल आयोजित

'सशक्त बेटी, समृद्ध बिहार: टुवार्ड्स एन्हान्सिंग द वैल्यू ऑफ गर्ल चाइल्ड' विषय पर पटना में कार्यशाल आयोजित

पटना. आज पटना में महिला एवं बाल विकास निगम (डब्ल्यूसीडीसी) द्वारा यूनिसेफ, सेव द चिल्ड्रेन एवं प्लान इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में "सशक्त बेटी, समृद्ध बिहार: टुवार्ड्स एन्हान्सिंग द वैल्यू ऑफ गर्ल चाइल्ड" विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान विकास आयुक्त विवेक कुमार सिंह ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि बिहार सरकार के द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के उत्थान के लिए अनेक पहल किये गए हैं। इसमें पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव एवं सरकारी नौकरियों में रिजर्वेशन, परिवार में शांति लाने के लिए शराबबंदी, चाइल्ड मैरिज और दहेज़ प्रथा के खिलाफ राज्य व्यापी मुहिम इत्यादी शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि योजनाओं का अपेक्षित परिणाम सुनिश्चित करने के लिए हमें पहले सूक्ष्म स्तर पर मुद्दों का पता लगाने की जरूरत है और फिर उसका समाधान करने के लिए एक समेकित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में योजनाओं की साक्ष्य-आधारित निगरानी भी बहुत महत्वपूर्ण है। जिन सूचकांकों पर हम पीछे हैं, उनकी एविडेंस बेस्ड मॉनिटरिंग करते हुए कमियों की पहचान कर समस्या का समाधान करना होगा। उन्होंने जागरूकता हेतु प्रचार-प्रसार के महत्व पर बल देते हुए कहा कि उपयुक्त गुणवत्तापूर्ण प्रचार-प्रसार सामग्री विकसित की जानी चाहिए।

महिला एवं बाल विकास निगम की अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरजोत कौर बम्हरा ने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य लैंगिक असमानता को खत्म करना है और इस दिशा में पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रगति हुई है। लेकिन अकेले सरकार सभी लिंग-संबंधी मुद्दों को संबोधित नहीं कर सकती है। इसलिए, समुदाय सहित सभी हितधारकों को एक साथ काम करने की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रख कर हमारे मुख्यमंत्री ने भी समाज सुधार यात्रा के माध्यम से  सामाजिक परिवर्तन का आह्वान किया है। यह सर्वविदित है कि सामजिक रूढ़ियों की वजह से सामाजिक परिवर्तन की तुलना में आर्थिक विकास सुनिश्चित करना ज़्यादा आसान है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जिन-जिन जिलों में लड़कियों का शिक्षा से जुड़ाव बढ़ा है, उन जिलों में बाल विवाह की दर में कमी आई है और फर्टिलिटी रेट भी नीचे आ रहा है। उन्होंने लड़कियों से आगे आने और जेंडर बैरियर तोड़ने के लिए स्वयं निर्णय लेने का आह्वान किया।

यूनिसेफ बिहार की राज्य प्रमुख नफीसा बिंते शफीक ने कहा कि लड़कियों की स्थिति को बदलने के लिए लड़कियों की शिक्षा में निवेश करना बेहद महत्वपूर्ण है। लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए पुरुषों और लड़कों की भागीदारी भी नितांत आवश्यकत है। राज्य सरकार की साइकिल योजना की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना उनके गृह देश बांग्लादेश में भी लागू की गई है। दुर्भाग्यवश, कई सरकारी योजनाओं के बावजूद, राज्य के विभिन्न हिस्सों में हमारे  दौरों के दौरान यह देखा गया है कि माता-पिता बालिकाओं के लिए निर्धारित अनुदान राशि का उपयोग न कर अन्य चीजों पर खर्च कर रहे हैं। इसके निराकरण के लिए व्यापक मॉनिटरिंग एवं जागरुकता को बढ़ावा देने की ज़रूरत है।


यूनिसेफ के कार्यक्रम मूल्यांकन एवं अनुश्रवन विशेषज्ञ प्रशन्ना एश ने अपनी प्रस्तुति में विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बिहार में लड़कियों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के शुरुआत में सेव द चिल्ड्रेन के राफे एजाज़ हुसैन ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की रूप रेखा पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्र के दौरान उड़ान योजना से संबद्ध किशोर-किशोरी समूह की बच्चियों ने लकड़ियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा आदि से जुड़े मुद्दों पर अपने सवाल रखे जिसका विशेषज्ञों एवं वरीय सरकारी पदाधिकारियों के द्वारा समुचित उत्तर दिया गया।

यूनिसेफ बिहार के कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पांड्या के नेतृत्व में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों ने बेटे-बेटियों के बीच फर्क नहीं करने और बेटियों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं सुरक्षा के बारे में समाज को जागरूक करने का संकल्प लिया। कार्यशाला के अंतिम सत्र में सभी प्रतिभागियों को 4 समूहों में बांट कर सोशल नॉर्म्स, इंफ्रास्ट्रक्चर/सेफ्टी, इनेब्लिंग एनवायरनमेंट और सुरक्षा जैसे विषयों के ज़रिए लड़कियों के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सामूहिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। यूनिसेफ, सेव द चिल्ड्रेन एवं प्लान इंडिया के प्रतिनिधियों की देखरेख में इस सत्र का सफल संचालन किया गया।

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