फतेहपुर में उमड़ा निषाद समाज: मुकेश सहनी ने गंगाजल हाथ में लेकर दिलाया आरक्षण का संकल्प
Uttar-Pradesh : विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में निषाद समाज को आरक्षण दिलाने के उद्देश्य से आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान निषाद समाज के लोगों ने उनका भव्य स्वागत करते हुए अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। प्रेस वार्ता में सहनी ने कहा कि निषाद समाज के अधिकारों और आरक्षण की लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
101 दिनों की संकल्प यात्रा से जागरूक हो रहा समाज, मोदी-योगी सरकार से मांग
मुकेश सहनी ने बताया कि पूरे उत्तर प्रदेश में 101 दिनों की 'निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा' चलाई जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों से जारी इस संघर्ष को अंजाम तक पहुँचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अविलंब ठोस एवं निर्णायक पहल करनी होगी।
हाथ में गंगाजल लेकर लिया संकल्प, 'आरक्षण नहीं तो 2027 में वोट नहीं'
वीआईपी प्रमुख ने कहा कि सत्ता में पहुँचकर कुछ नेता समाज के अधिकारों को भूल गए, लेकिन अब समाज पूरी तरह जाग चुका है। फतेहपुर की धरती पर हजारों लोगों ने हाथ में पवित्र गंगाजल लेकर यह संकल्प लिया कि यदि 2027 के चुनाव से पहले निषाद समाज को आरक्षण नहीं दिया गया, तो वे भाजपा और उसके सहयोगी दल को वोट नहीं देंगे। उन्होंने साफ किया कि समाज अब किसी के बहकावे में न आकर अपने बच्चों के भविष्य के लिए मतदान करेगा।
'हजारों बेटे गांव-गांव जाकर कराएंगे संकल्प', वीडियो बनाकर पीएम-गृहमंत्री को भेजा जाएगा
सहनी ने आरोप लगाया कि सरकार उनके कार्यक्रमों की अनुमति में देरी कर उन्हें रोकने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भले ही रथ यात्रा रोकी जाए, लेकिन अब रणनीति बदलते हुए हजारों निषाद बेटे गांव-गांव जाकर लोगों को आरक्षण का संकल्प दिलाएंगे। इस संकल्प अभियान का वीडियो बनाकर जिले के नेताओं समेत प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को भेजा जाएगा ताकि वे समाज की एकजुटता को देख सकें।
दिल्ली और लखनऊ की सत्ता के खिलाफ संघर्ष, जारी रहेगा आंदोलन
मुकेश सहनी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध न होकर दिल्ली और लखनऊ की सत्ता में बैठे उन हुक्मरानों के खिलाफ है जो निषाद समाज को उसका हक नहीं दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह संघर्ष आरक्षण मिलने तक निरंतर जारी रहेगा और यदि समय रहते आरक्षण नहीं मिला, तो 2027 में निषाद समाज पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन के लिए मतदान करेगा।
देवांशु प्रभात की रिपोर्ट