173 साल पुराने पुराने स्टेशन का होगा कायाकल्प, बनेंगे नए प्लेटफॉर्म, 200 परसेंट बढ़ जाएगी यात्रियों की संख्या, जानें रेलवे की पूरी योजना
भारतीय रेलवे ने देश के सबसे पुराने और व्यस्ततम स्टेशनों में से एक, हावड़ा स्टेशन को अगले पांच वर्षों में पूरी तरह अपग्रेड करने का मेगा प्लान तैयार किया है, जिससे ट्रेनों के परिचालन की क्षमता मौजूदा स्तर से दोगुनी हो जाएगी।
N4N Desk - रेल मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों के भीतर 1854 में बने ऐतिहासिक हावड़ा स्टेशन को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने की योजना बनाई है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक ट्रेनों के संचालन की क्षमता को मौजूदा स्तर से दोगुना करना है। ईस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) शिब्रम माझी के अनुसार, यह विस्तार न केवल बढ़ती यात्री मांग को पूरा करेगा, बल्कि दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) रूट से आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों के वेटिंग टाइम में भी प्रभावी कमी लाएगा।
प्लेटफॉर्म नंबर 14 और 15 का आधुनिक विस्तार
स्टेशन की टर्मिनल क्षमता बढ़ाने की दिशा में जोनल रेलवे ने प्लेटफॉर्म नंबर 14 और 15 के पुनर्निर्माण और विस्तार का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। प्लेटफॉर्म नंबर 15 की लंबाई को 312 मीटर से बढ़ाकर अब 591 मीटर कर दिया गया है। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यहाँ अब 12 कोच वाली लोकल ट्रेनों के बजाय 24 कोच वाली लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें आसानी से खड़ी हो सकेंगी। इसी तरह, प्लेटफॉर्म नंबर 14 की लंबाई भी बढ़ाकर 581 मीटर कर दी गई है ताकि लंबी ट्रेनों का परिचालन सुगम हो सके।
दो नए प्लेटफॉर्म्स से मिलेगी परिचालन को गति
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए हावड़ा स्टेशन को दो बिल्कुल नए प्लेटफॉर्म मिलने जा रहे हैं। योजना के अनुसार, प्लेटफॉर्म नंबर 24 की लंबाई 635 मीटर रखी जाएगी, जो विशेष रूप से 24 कोच वाली भारी-भरकम ट्रेनों के लिए होगा। वहीं, प्लेटफॉर्म नंबर 16 की लंबाई 300 मीटर होगी, जिसे 12 कोच वाली ट्रेनों के लिए आरक्षित किया जाएगा। इन नए प्लेटफॉर्म्स के बन जाने से लंबी दूरी की एक्सप्रेस सेवाओं और उपनगरीय (लोकल) ट्रेनों के ट्रैफिक को पूरी तरह अलग किया जा सकेगा, जिससे ट्रेनों की समय पाबंदी (Punctuality) में बड़ा सुधार होगा।
1854 से अब तक: विस्तार का गौरवशाली सफर
हावड़ा स्टेशन का इतिहास भारतीय रेलवे के विकास की कहानी कहता है। 1854 में अपनी शुरुआत के बाद से इस स्टेशन का कई चरणों में विस्तार हुआ है। 1905 में यहाँ प्लेटफॉर्म की संख्या 7 थी, जो 1984 में बढ़कर 15 और 1992 में न्यू टर्मिनल कॉम्प्लेक्स बनने के बाद 19 तक पहुँची। अंतिम बार 2009 में हुए विस्तार के बाद यहाँ कुल 23 प्लेटफॉर्म कार्यरत हैं। अब 2026 से शुरू होने वाला यह नया चरण इस ऐतिहासिक स्टेशन को 21वीं सदी की अत्याधुनिक चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।
भीड़ प्रबंधन और बेहतर यात्री अनुभव
इस मेगा अपग्रेडेशन प्लान का सीधा असर यात्रियों की सुविधा और भीड़ प्रबंधन पर पड़ेगा। प्लेटफॉर्मों की लंबाई बढ़ने और नए ट्रैक जुड़ने से बोर्डिंग और डिबोर्डिंग की प्रक्रिया अधिक सरल और सुरक्षित हो जाएगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस बुनियादी ढांचे के विकास से स्टेशन पर होने वाली भगदड़ जैसी स्थितियों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा और परिचालन में अधिक लचीलापन (Operational Flexibility) आएगा। यह प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल और पूरे पूर्वी भारत के रेल नेटवर्क के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।