बेजुबान का बेमिसाल प्रेम:2 साल के 'दोस्त' की मौत पर टूटा परिवार,विधि-विधान से किया गया मुर्गे का अंतिम संस्कार
एक परिवार द्वारा पाले गए एक मुर्गे की मौत हो जाने पर दूसरा मुर्गा उस पर गिरकर उसे बार-बार जगाता था, जिस पर मालिक ने मृत मुर्गे का अंतिम संस्कार कर दिया
एक आदिवासी किसान भुक्या वीरन्ना ने दो साल पहले दो मुर्गों को पाला था। वीरन्ना और उनका परिवार इन मुर्गों को पक्षी नहीं, बल्कि अपने बच्चों की तरह मानते थे। ये दोनों मुर्गे भी परिवार के प्रति बेहद वफादार थे और आपस में भाई-बहनों की तरह रहते थे। लेकिन खुशियों भरे इस घर में तब मातम छा गया जब अचानक इनमें से एक मुर्गे की मौत हो गई। तेलंगाना के महबूबबाद जिले के लक्ष्मीपुरम स्थित गामी थांडा के निवासी वीरन्ना और उसका परिवार फुट फुट कर रोने लगा।
साथी को जगाने की मूक तड़प
इस घटना का सबसे भावुक कर देने वाला पहलू दूसरे मुर्गे का व्यवहार था। जब एक मुर्गे ने दम तोड़ दिया, तो उसका साथी यह मानने को तैयार नहीं था कि वह अब इस दुनिया में नहीं है। वह बार-बार अपने मृत साथी के शरीर पर गिरकर उसे अपनी चोंच और पैरों से जगाने की कोशिश करता रहा। मूक पक्षी की यह तड़प और वियोग देखकर वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं, जिसने यह साबित कर दिया कि संवेदनाएं केवल इंसानों तक सीमित नहीं हैं।
आंसुओं के साथ दी गई अंतिम विदाई
मुर्गे की मौत से वीरन्ना का परिवार इतना टूट गया कि उन्होंने उसे कचरे में फेंकने या साधारण तरीके से हटाने के बजाय पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। जब मुर्गे की अंतिम यात्रा घर से निकली, तो दूसरा मुर्गा भी उसके पीछे-पीछे चलता रहा। मालिक और ग्रामीणों ने मिलकर उसे दफनाया और अपने प्रिय पालतू जीव के प्रति सम्मान और गहरा प्रेम व्यक्त किया।
सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय
यह घटना अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। पशु प्रेम की इस मिसाल ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बेजुबान जानवर भी अपनों के खोने का गम उतनी ही शिद्दत से महसूस करते हैं। भुक्या वीरन्ना और उनके मुर्गों के बीच के इस भावनात्मक बंधन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो मानवीय संवेदनाओं की एक नई परिभाषा लिख रहे हैं।