Patna Police: CM की नसीहतें फेंक दीं कूड़े में! रात 3 बजे पटना जंक्शन पर पुलिस का आतंक! थाने का ड्राइवर बना दरिंदा! आम आदमी का दांत तोड़ डाला, नाक फोड़ दी, किसके संरक्षण में घूम रहा है ये दबंग ड्राइवर?

Patna Police: पटना में कानून की धज्जियां उड़ाती एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पुलिस व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ...

Patna Police Driver Accused of Assault Man Tooth Broken
रात 3 बजे पटना जंक्शन पर पुलिस का आतंक! - फोटो : reporter

Patna Police: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पुलिस मुख्यालय लगातार पुलिसकर्मियों को आम जनता के साथ तहज़ीब, शालीनता और विनम्र व्यवहार की नसीहत देते रहे हैं। लेकिन राजधानी पटना में उन्हीं हिदायतों की धज्जियां उड़ाती एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पुलिस व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां थाने की गाड़ी चलाने वाले एक निजी चालक पर एक व्यक्ति के साथ बेरहमी से मारपीट करने और उसका दांत तोड़ देने का आरोप लगा है।

आरोपों के मुताबिक, कोतवाली थाना की गाड़ी संख्या-3 का निजी चालक चंदन कुमार पटना जंक्शन के पास रात करीब तीन बजे एक व्यक्ति से उलझ पड़ा। देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में बदल गई और चालक ने कथित तौर पर पीड़ित पर हमला कर दिया। आरोप है कि इस हमले में व्यक्ति का दांत टूट गया और उसकी नाक से खून बहने लगा। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों के बीच पुलिस से जुड़े लोगों के बढ़ते दुस्साहस को लेकर चर्चा शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि पीड़ित की ओर से इस पूरे मामले की शिकायत कोतवाली थाना प्रभारी को दे दी गई है। मामला सामने आने के बाद आरोपी चालक चंदन कुमार को आनन-फानन में पटना जंक्शन क्षेत्र से हटाकर थाने भेज दिया गया। पटना जंक्शन टीओपी प्रभारी ने भी घटना की पुष्टि की है। वहीं कोतवाली थाना प्रभारी ने आरोपी चालक के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसके खिलाफ विभागीय या कानूनी स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं।

हैरानी की बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब उक्त चालक का नाम विवादों में आया हो। इससे पहले भी इसी निजी चालक पर दबंगई और मनमानी के आरोप लग चुके हैं। आरोप है कि उसने एक दुकान से मुफ्त में कोल्ड ड्रिंक ली थी। जब एक पत्रकार ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सच्चाई सामने लाने की कोशिश की, तब चालक ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही पत्रकार के साथ बदसलूकी की थी। उस समय भी कार्रवाई की चर्चा हुई, लेकिन आरोप है कि कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

यही वजह है कि अब इस नए मामले के सामने आने के बाद लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में एक निजी चालक लगातार विवादों में घिरने के बावजूद बेखौफ घूम रहा है। क्या उसे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है, या फिर विभागीय ढिलाई ने उसके हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वह कानून को ही चुनौती देने लगा है?

बिहार में पुलिस की कार्यशैली को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। कभी आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आती हैं तो कभी अपराधियों के सामने पुलिस की बेबसी चर्चा का विषय बनती है। लेकिन इस मामले ने एक नया प्रश्न खड़ा कर दिया है जब थाने का एक निजी चालक ही कानून अपने हाथ में लेने लगे, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कानून की किस किताब में किसी निजी चालक को किसी नागरिक की पिटाई करने, उसका दांत तोड़ने और खुद ही फैसला सुनाने का अधिकार दिया गया है? अब निगाहें राजधानी के आला पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में महज औपचारिक कार्रवाई करते हैं या फिर कानून के दायरे में निष्पक्ष और कठोर कदम उठाकर यह संदेश देते हैं कि वर्दी की आड़ में दबंगई किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

रंजीत कुमार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट