America Iran attack: ईरान पर अमेरिका का महावार, बंकर बस्टर बमों से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य तट दहला, मिसाइल अड्डे तबाह!खाड़ी में बारूद का उठा तूफान

America Iran attack: अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के दक्षिणी साहिल पर मौजूद अहम मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाते हुए जबरदस्त बमबारी की है।

US Strikes Iran Hard Strait of Hormuz Shaken by Bombs
बंकर बस्टर बमों से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य तट दहला- फोटो : social Media

America Iran attack: पश्चिम एशिया में जारी जंग अब एक नए और बेहद ख़तरनाक मोड़ पर पहुँच गई है, जहाँ सियासी तनातनी अब खुली जंगी कार्रवाई में तब्दील होती नजर आ रही है। यूएस सेंट्रल कमांड CENTCOM ने तस्दीक की है कि अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के दक्षिणी साहिल पर मौजूद अहम मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाते हुए जबरदस्त बमबारी की है। इस हमले में पहली बार 5,000 पाउंड वजनी बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जो ज़मीन के अंदर गहराई तक बने मजबूत कंक्रीट ठिकानों को तबाह करने की काबिलियत रखते हैं।

फौजी ज़राए के मुताबिक यह ऑपरेशन सुबह-सवेरे अंजाम दिया गया, जिसका असल मकसद ईरान की एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलों को तबाह करना था। CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि ये मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय जहाज़रानी और वैश्विक तिजारती रास्तों के लिए सीधा ख़तरा बन चुकी थीं। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास का इलाका इस वक्त सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है, जहाँ से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति गुजरती है।

इस जंगी कार्रवाई के बाद पूरी दुनिया में बेचैनी और खौफ का माहौल है। सियासी हलकों में इसे एक बड़ी जियो-पॉलिटिकल तनाव की शुरुआत माना जा रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए इसे “बेहद बड़ी बेवकूफी” करार दिया, हालांकि उन्होंने यह भी इशारा किया कि NATO मुल्क इस जंग में खुलकर साथ देने से कतरा रहे हैं।

ट्रंप के मुताबिक, NATO के सदस्य देश अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त मोर्चे से सहमत तो हैं, मगर सीधे तौर पर शामिल होने से बच रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर कोई हामी भरता है, लेकिन मदद के वक्त पीछे हट जाता है, जो इस जंग की सियासी पेचीदगियों को उजागर करता है। इसी दरमियान यूरोपीय देशों का रवैया भी काफी हद तक एहतियाती नजर आ रहा है। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने साफ लफ्जों में कहा कि उनका मुल्क इस संघर्ष का हिस्सा बनने के लिए तैयार नहीं है। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने भी संकेत दिया कि हालात सामान्य होने तक उनका देश किसी सैन्य कार्रवाई में शरीक नहीं होगा।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज़रानी ठप होने के कारण कच्चे तेल की सप्लाई पर जबरदस्त असर पड़ा है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। मौजूदा हालात ने यह साफ कर दिया है कि यह टकराव सिर्फ एक क्षेत्रीय जंग नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले सकता है। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सियासी दखल से हालात काबू में आएंगे या फिर यह जंग और भी भयावह शक्ल अख्तियार करेगी।