बिहार में सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अब PPP मॉडल पर चलेंगे! 33 संस्थान जाएंगे निजी हाथों में

बिहार के अधिकांश मेडिकल कॉलेजों को अब निजी हाथों में सौपने की तैयारी है. हेल्थकेयर सर्विस, मेडिकल एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए PPP मॉडल के तहत 33 सरकारी मेडिकल कॉलेज चलाने का प्लान है।

सरकारी मेडिकल कॉलेज अब PPP मॉडल- फोटो : news4nation

Bihar Medical Colleges : बिहार में स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने अधिकांश सरकारी मेडिकल कॉलेजों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। सरकार ने 33 सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के विकास, संचालन और प्रबंधन के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों और अस्पताल समूहों से रुचि प्रस्ताव (EoI) आमंत्रित किए हैं। इस संबंध में 17 जून को पटना में हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ परामर्श बैठक आयोजित की जाएगी।


स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव कुमार रवि के अनुसार, प्रस्तावित 33 मेडिकल कॉलेजों में 17 नए ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होंगे, जबकि 16 ब्राउनफील्ड मॉडल के तहत निजी संस्थाओं को सौंपे जाएंगे। ब्राउनफील्ड से आशय उन मेडिकल कॉलेजों से है जो पहले से संचालित हैं या जिनका निर्माण कार्य चल रहा है।

ये सब होंगे PPP

वर्तमान में बिहार में 12 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और आठ नए मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। यानी कुल 20 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। सरकार की योजना के अनुसार इनमें से 16 संस्थानों का संचालन और प्रबंधन निजी कंपनियों को दिया जा सकता है। ऐसे में राज्य में केवल कुछ चुनिंदा संस्थान ही पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रह सकते हैं, जिनमें IGIMS, AIIMS पटना, PMCH और NMCH जैसे बड़े संस्थान शामिल हो सकते हैं।


60 और 30 वर्ष की लीज

सरकार की ओर से जारी अभिरुचि पत्र (EoI) के अनुसार, ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में निजी कंपनियों को 60 वर्षों की लीज पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेजों का संचालन 30 वर्ष की रियायत (कन्सेशन) अवधि के लिए निजी संस्थाओं को सौंपा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा और राज्य में डॉक्टरों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।


17 जून को बड़ा फैसला

17 जून को होने वाली परामर्श बैठक में सरकार संभावित निवेशकों और अस्पताल समूहों से परियोजना की व्यवहार्यता, जोखिम साझेदारी, राजस्व मॉडल, नियामकीय मंजूरियों और सिंगल विंडो क्लियरेंस जैसी व्यवस्थाओं पर सुझाव लेगी। इसके बाद ट्रांजैक्शन एडवाइजर की नियुक्ति कर विस्तृत शर्तें तैयार की जाएंगी और फिर प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया शुरू होगी।


 ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम का हिस्सा

यह पहल बिहार सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत वर्ष 2025- 30 के दौरान राज्य में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना का तेजी से विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है।


आलोचना के केंद्र में सरकार

हालांकि, विपक्ष और स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के बीच इस योजना को लेकर बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में सरकारी मेडिकल कॉलेज निजी प्रबंधन को सौंपे जाते हैं तो गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए सस्ती चिकित्सा सेवाओं और मेडिकल शिक्षा की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार का दावा है कि अंतिम मॉडल तय करते समय गरीब मरीजों के लिए रियायती इलाज और शुल्क नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी निर्णय लिया जाएगा।