यह कैसा दुर्भाग्य ! बिहार पुलिस के सैकड़ों जवान हिन्दी में फेल, शिक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल, प्रमोशन भी अटका

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल उठा है क्योंकि जिस राज्य में हिंदी सबके जुबान पर होती है वहां बिहार पुलिस से जुडी प्रमोशन की एक परीक्षा में सर्वाधिक सिपाही हिंदी विषय में ही फेल हो जाते हैं

Bihar Police Promotion Exam - फोटो : news4nation

Bihar Police Promotion Exam : जिस राज्य में हिन्दी सबसे अधिक बोली जाती है, जहां दशकों से पढ़ाई-लिखाई में हिन्दी को अंग्रेजी पर प्राथमिकता दी जाती रही है, उसी बिहार में पुलिस विभाग के कई जवान हिन्दी की बुनियादी परीक्षा भी पास नहीं कर सके। विभागीय प्रमोशन परीक्षा के नतीजों ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों में राजभाषा हिन्दी की समझ आखिर कितनी मजबूत है। हिन्दी विषय में असफल रहने की वजह से बड़ी संख्या में सिपाहियों का प्रमोशन रुक गया है।


391 सिपाही अयोग्य 

विभागीय परीक्षा में सफल रहे 1545 सिपाहियों को एएसआई (जमादार) पद पर पदोन्नत किया गया है। अब ये अधिकारी विभिन्न आपराधिक मामलों की जांच और अन्य पुलिस जिम्मेदारियां संभालेंगे। वहीं बिहार पुलिस विभाग में सिपाही से जमादार (एएसआई) पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित विभागीय परीक्षा में कुल 391 सिपाहियों को अयोग्य घोषित किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इनमें 200 से अधिक सिपाही केवल हिन्दी विषय में फेल हुए हैं। वहीं, 100 से अधिक ऐसे सिपाही भी हैं जिनके खिलाफ पहले से विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, जिसके कारण उन्हें भी प्रमोशन के लिए अयोग्य माना गया।


जानकारी के मुताबिक, लिखित परीक्षा में कई अभ्यर्थी हिन्दी की सामान्य व्याकरण संबंधी गलतियां भी नहीं सुधार सके। 'मैं' और 'में' या 'है' और 'हैं' जैसे सामान्य शब्दों के सही प्रयोग में भी कई सिपाही चूक गए। इसका सीधा असर उनके परिणाम पर पड़ा और वे प्रमोशन की दौड़ से बाहर हो गए।


हिन्दी पास करना अनिवार्य

बिहार पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि जमादार (एएसआई) बनने के लिए हिन्दी विषय की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। यदि कोई सिपाही हिन्दी में सफल नहीं होता है तो उसका प्रमोशन रोक दिया जाता है। इतना ही नहीं, ऐसे कर्मचारियों को एसीपी (ACP) और एमएसीपी (MACP) जैसी सेवा संबंधी वित्तीय और पदोन्नति योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता।


बुनियादी दक्षता को लेकर नई बहस

हालांकि विभाग ने असफल सिपाहियों को राहत देते हुए कहा है कि उन्हें अगली विभागीय परीक्षा में दोबारा शामिल होने का अवसर मिलेगा। यदि वे अगली बार हिन्दी विषय में सफल हो जाते हैं और अन्य सभी निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं, तो उन्हें पदोन्नति का लाभ दिया जाएगा। तब तक उन्हें अपने वर्तमान पद पर ही कार्य करना होगा।


विभागीय परीक्षा के इस परिणाम ने हिन्दी की बुनियादी दक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ऐसे राज्य में, जहां प्रशासनिक और सामाजिक जीवन में हिन्दी का व्यापक इस्तेमाल होता है, पुलिसकर्मियों का हिन्दी विषय में बड़ी संख्या में असफल होना चिंता का विषय माना जा रहा है।