बच्चा पैदा करने में नंबर 1 बिहारी, प्रजनन दर ने बढ़ाई नई चिंता, देश का TFR पहली बार रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे

देश में सबसे ज्यादा प्रति दंपत्ति बच्चे पैदा करने वाले राज्य में बिहार सबसे ऊपर है. जहां पूरे देश में प्रजनन दर में बड़ा बदलाव आया है वहीं बिहार में सुधारों के बाद भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.

Fertility rate in Bihar : भारत की जनसंख्या संरचना में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। मई 2026 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार, देश का टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) 2024 में घटकर 1.9 पर पहुंच गया है। यह पहली बार है जब भारत का औसत प्रजनन दर 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे चला गया है। हालांकि इस राष्ट्रीय गिरावट के बीच बिहार अब भी देश का सबसे अधिक प्रजनन दर वाला राज्य बना हुआ है, जहां TFR 2.9 दर्ज किया गया है।


रिपोर्ट के अनुसार बिहार का TFR पिछले एक दशक में 3.2 से घटकर 2.9 हुआ है। यह लगभग 9.4 प्रतिशत की गिरावट है, जो देश के बड़े राज्यों में सबसे कम कमी मानी जा रही है। इसका मतलब है कि जहां अधिकांश राज्यों में जन्म दर तेजी से घटी है, वहीं बिहार में यह बदलाव अपेक्षाकृत धीमा रहा है। इतन ही नहीं बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में औसत प्रति दम्पत्ति प्रजनन दर 3 है जबकि शहरी इलाकों में यह 2.3 है। 


बिहार सहित छह राज्य लेवल से ऊपर

देश के बड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिहार (2.9) सबसे ऊपर है। इसके बाद उत्तर प्रदेश (2.6), मध्य प्रदेश (2.4), राजस्थान (2.3), छत्तीसगढ़ (2.2) और झारखंड (2.2) ऐसे राज्य हैं जहां TFR अब भी 2.1 के रिप्लेसमेंट स्तर से ऊपर है। बाकी सभी राज्यों में प्रजनन दर इस स्तर से नीचे पहुंच चुकी है। वहीं, दिल्ली में सबसे कम TFR 1.2 दर्ज किया गया है। इसके बाद केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का TFR 1.3 है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे राज्य भी काफी पहले रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच चुके हैं।


क्या होता है टोटल फर्टिलिटी रेट?

टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) किसी महिला द्वारा अपने प्रजनन काल में जन्म दिए जाने वाले बच्चों की औसत संख्या को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार 2.1 का TFR रिप्लेसमेंट लेवल माना जाता है, क्योंकि इस स्तर पर एक पीढ़ी खुद को अगली पीढ़ी में प्रतिस्थापित कर सकती है। यदि लंबे समय तक यह दर 2.1 से नीचे रहती है, तो जनसंख्या वृद्धि धीमी पड़ने लगती है और भविष्य में आबादी घटने की स्थिति भी बन सकती है।


देशभर में घट रहा जन्म दर

रिपोर्ट बताती है कि भारत में फर्टिलिटी में गिरावट कोई नई घटना नहीं है। 2012-14 के दौरान देश का TFR 2.3 था, जो 2022-24 के दौरान घटकर 1.9 हो गया। यानी करीब 17.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। राज्यों के स्तर पर भी गिरावट का रुझान स्पष्ट है। गुजरात में TFR में 25 प्रतिशत, तमिलनाडु में 23.5 प्रतिशत, कर्नाटक में 21.1 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 19.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पश्चिम बंगाल और राजस्थान में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।


गांव और शहरों के बीच अंतर 

SRS रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच प्रजनन दर का अंतर अभी भी बना हुआ है। ग्रामीण भारत में TFR 2.1 है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह केवल 1.5 है। पिछले दशक में ग्रामीण क्षेत्रों का TFR 2.6 से घटकर 2.1 हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 1.8 से घटकर 1.5 पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, शहरीकरण, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बदलती सामाजिक प्राथमिकताएं इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं।


जनसंख्या संतुलन की नई चुनौती

भारत के लिए TFR का 1.9 तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। आने वाले वर्षों में कार्यशील आयु वर्ग की आबादी, बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और श्रमबल की उपलब्धता जैसे मुद्दे नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल तस्वीर यह है कि देश की जन्म दर लगातार घट रही है, लेकिन बिहार अभी भी सबसे अधिक प्रजनन दर वाला राज्य बना हुआ है और राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है, जिससे राज्य की जनसंख्या संरचना देश के अन्य हिस्सों की तुलना में अलग दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है।