बिहार की कांवर झील की बदहाली पर NGT सख्त, एशिया की सबसे बड़ी झील पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस

कभी 63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली कांवर झील अब जलस्तर में गिरावट और अतिक्रमण के कारण छोटे-छोटे जलाशयों में बंटती जा रही है। एशिया की सबसे बड़ी ऑक्सबो झील मानी जाने वाली कांवर झील के लगातार सिकुड़ते जल क्षेत्र पर NGT ने गंभीर चिंता जताई है

कांवर झील/Kanwar Lake- फोटो : news4nation

Kanwar Lake : बिहार की प्रसिद्ध कांवर झील की बिगड़ती पारिस्थितिकी को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। एशिया की सबसे बड़ी ऑक्सबो झील मानी जाने वाली कांवर झील के लगातार सिकुड़ते जल क्षेत्र, अतिक्रमण और जैव विविधता में कमी को लेकर NGT ने केंद्र और बिहार सरकार समेत कई संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। 


कांवर झील बिहार के बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर क्षेत्र में स्थित है। यह झील बूढ़ी गंडक नदी के घुमावदार प्रवाह से बनी एक अनूठी ऑक्सबो वेटलैंड है। वर्ष 2020 में इसे रामसर साइट का दर्जा मिला था। यह झील लंबे समय से स्थानीय मछुआरा समुदायों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार रही है।


63 वर्ग किलोमीटर से सिमटकर छोटे जलाशयों में बंटी झील

एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए NGT ने  मामले की सुनवाई की। रिपोर्ट में कांवर झील की खराब होती पर्यावरणीय स्थिति और जैव विविधता में गिरावट का उल्लेख किया गया था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कभी करीब 63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली कांवर झील अब जलस्तर में गिरावट और अतिक्रमण के कारण धीरे-धीरे छोटे-छोटे जलाशयों में बंटती जा रही है। झील में मछलियों की संख्या में भी काफी कमी आई है। कई स्थानीय मछली प्रजातियां कुछ हिस्सों से कम हो गई हैं या पूरी तरह गायब होने की स्थिति में हैं।


बूढ़ी गंडक से जोड़ने का सुझाव 

NGT ने कहा कि झील के संरक्षण के लिए इसके जल क्षेत्र का सीमांकन और मैपिंग जरूरी है। साथ ही अतिक्रमण हटाने और झील में जल प्रवाह बहाल करने की आवश्यकता है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कांवर झील के अस्तित्व के लिए मानसून के दौरान जल पुनर्भरण और भूजल रिसाव बेहद महत्वपूर्ण है। झील को बूढ़ी गंडक नदी से जोड़ने और अन्य संरक्षण उपायों पर भी विचार किया जाना चाहिए।


केंद्र और बिहार सरकार को नोटिस

इस मामले में एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, बिहार सरकार के मुख्य सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, बिहार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया है। ट्रिब्यूनल ने सभी संबंधित पक्षों को हलफनामे के जरिए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।


NGT ने कहा कि मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जैव विविधता अधिनियम और जल प्रदूषण निवारण कानून के प्रावधानों से जुड़ा है। रामसर साइट होने के कारण कंवर झील का अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय महत्व है और इसके पारिस्थितिक स्वरूप को संरक्षित करना बेहद जरूरी है। कांवर झील का संकट केवल बिहार के लिए नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों और स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण से जुड़ा बड़ा पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है।