पटना में नदियों का तांडव! मनेर से मोकामा तक सैलाब हीं सैलाब, 108 रास्ते बंद,सैकड़ों घर डूबे, टूटे तटबंध ने बढ़ाई दहशत
Patna Flood Crisis: पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर अब महज चेतावनी नहीं, बल्कि सैलाब के बढ़ते खतरे का खौफनाक इशारा बन चुका है।...
Patna Flood Crisis: पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर अब महज चेतावनी नहीं, बल्कि सैलाब के बढ़ते खतरे का खौफनाक इशारा बन चुका है। नदी का पानी लगातार ऊपर चढ़ रहा है और शहर के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी दाखिल होने लगा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए पटना सुरक्षा दीवार के सभी 108 रास्तों को बंद कर दिया गया है, ताकि नालों के रास्ते गंगा का पानी शहर में घुसकर तबाही न मचा सके।आपदा प्रबंधन विभाग के अलर्ट के बाद डीएम कुंदन कुमार ने वरीय अधिकारियों के साथ दीघा घाट से बिंद टोली, एलसीटी घाट और गोसाईं टोला तक संवेदनशील इलाकों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान 13 स्लूइस गेटों के सीपेज को सील कराया गया। सदाकत आश्रम के पास नाले को तत्काल ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया है। सभी स्लूइस गेट और नालों की 24 घंटे निगरानी के साथ शहर के ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों को भी अलर्ट पर रखा गया है।प्रशासन ने तटबंधों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। कहीं कटाव या कमजोर स्थिति दिखाई देती है तो तत्काल मरम्मत कराने को कहा गया है। क्योंकि इस वक्त एक छोटी-सी लापरवाही भी बड़े संकट में तब्दील हो सकती है।वहीं पटना जिले में गंगा, सोन, पुनपुन और दरधा नदियों के बढ़ते जलस्तर ने अब तबाही का खौफनाक मंजर पैदा कर दिया है। ग्रामीण दियारा इलाकों के बाद बाढ़ का पानी तेजी से शहरी इलाकों की ओर बढ़ने लगा है। कई घरों में पानी घुस चुका है, कच्चे और मिट्टी के मकान ढहने लगे हैं। खेतों में खड़ी धान और मकई की फसलें पानी में डूब गई हैं। कई सड़कें बाढ़ की तेज धार में क्षतिग्रस्त होकर संपर्क मार्ग बन चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि सैकड़ों लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं।मनेर से मोकामा तक हजारों परिवारों के सामने दाना-पानी और सुरक्षित ठिकाने का संकट खड़ा हो गया है। लोग ऊंची जगहों, रेलवे स्टेशनों, सड़कों, स्कूलों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। रोजी-रोजगार के साधन बाढ़ की भेंट चढ़ने से गरीब और ग्रामीण परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई स्थानों पर लोगों ने राहत और प्रशासनिक सुविधा पर्याप्त नहीं मिलने की शिकायत भी की है।
गंगा-सोन के बीच बसा गांव बना टापू
मनेर का इस्लामगंज गांव गंगा और सोन के बढ़ते पानी के बीच पूरी तरह टापू में तब्दील हो गया है। गांव के चारों तरफ पानी फैल जाने से लोगों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। अब नाव ही आवागमन का एकमात्र सहारा बची है। खाना बनाने से लेकर शौच जैसी बुनियादी जरूरतों तक के लिए ग्रामीणों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
बख्तियारपुर में कच्चे घरों पर आफत
बख्तियारपुर के दियारा क्षेत्र में बाढ़ ने सबसे ज्यादा कहर कच्चे और झोपड़ीनुमा घरों पर बरपाया है। पानी के दबाव से मकान कमजोर होकर गिरने लगे हैं। चिरैया निवासी चनर राय का घर भी बाढ़ के पानी की वजह से ध्वस्त हो गया। आशियाना उजड़ने के बाद परिवार के सामने रहने की गंभीर समस्या पैदा हो गई है।
दानापुर की छह पंचायतें जलमग्न
दानापुर के दियारा क्षेत्र की सभी छह पंचायतों में बाढ़ का पानी घरों में प्रवेश कर चुका है। सैकड़ों परिवार अपने मवेशियों के साथ बलदेव इंटर स्कूल में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर में पहुंच रहे हैं। हालांकि कई परिवारों के कुछ सदस्य अब भी गांव में रुके हुए हैं, ताकि घर और सामान की हिफाजत कर सकें। पानी घटने की उम्मीद में वे जोखिम के बीच वहीं टिके हुए हैं।
दरधा नदी ने धनरूआ में खोला तबाही का रास्ता
धनरूआ प्रखंड में दरधा नदी का उफान अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। बीर के महुआतड़ के पास बुधवार रात तटबंध करीब 20 से 25 फीट तक टूट गया। इसके बाद बाढ़ का पानी तेजी से रिहायशी इलाके में घुसा और करीब 30 घरों में पानी पहुंच गया। घरों में पानी घुसने के बाद ग्रामीण रात से ही तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। पानी बीर अस्पताल के गेट तक पहुंच गया है।देवधा, लक्ष्मीचक, मुस्तफापुर और सदीसोपुर समेत कई गांवों के खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं। ग्रामीणों के मुताबिक दरधा नदी में कई वर्षों बाद इतना भयावह जलस्तर देखने को मिला है।बाढ़ की बढ़ती रफ्तार ने पटना जिले के कई इलाकों में जिंदगी की रफ्तार रोक दी है। घर, खेत, सड़क और रोजगार सब पर पानी का शिकंजा कसता जा रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित निकालना, मवेशियों को बचाना और राहत सामग्री समय पर पहुंचाना है।
मोकामा के दियारा में पलायन तेज
गंगा के जलस्तर में लगातार इजाफे के बाद मोकामा के दियारा इलाकों से विस्थापन शुरू हो गया है। शिवनार पंचायत के जंजीरा दियारा और कसहा दियारा के पांच गांवों में पानी घुसने की खबर है। जंजीरा दियारा से 150 से अधिक लोग मवेशियों के साथ मोकामा प्रखंड कार्यालय में शरण ले चुके हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं।
घरों में घुसा पानी, दियारा से शुरू हुआ पलायन
गंगा पथ के नीचे स्थित बिंदटोली पानी से घिर गया है। सुरक्षा बांध के उत्तर दीघा, एलसीटी घाट, राजापुर और दुजरा के कई घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। रिवर फ्रंट पर भी पानी चढ़ गया है। पटना सिटी में महावीर घाट से भद्रघाट जाने वाली सड़क पर पानी फैलने लगा है।दियारा इलाकों में हालात और ज्यादा भयावह हैं। सात पंचायतों के जलमग्न होने से करीब तीन लाख की आबादी प्रभावित बताई जा रही है। खेत, खलिहान और घर पानी में डूबने के बाद लोग अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन करने को मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से दियारा से लोगों को निकालने के लिए 66 नावें मुफ्त चलाई जा रही हैं।बाढ़ और दानापुर में एक-एक तथा पाटलिपुत्र अंचल में दो सामुदायिक रसोई केंद्र और राहत शिविर शुरू किए गए हैं। पशुओं के लिए पांच शिविर बनाए गए हैं, जहां चारा, दवा और इलाज की व्यवस्था की गई है।
SDRF और मोटरबोट तैनात, दो नावें रिजर्व
उमानाथ, अलखनाथ, एनआईटी, गांधी घाट, कंगन घाट, दीघा घाट और जेपी सेतु घाट पर मोटरबोट के साथ एसडीआरएफ की तैनाती की गई है। आपात स्थिति के लिए दो नावों को रिजर्व रखा गया है।
पुनपुन ने भी बढ़ाई दहशत
पुनपुन नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान को पार कर चुका है। गुरुवार को इसका जलस्तर 52.82 मीटर पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 50.60 मीटर है। कई जगह तटबंधों से पानी का रिसाव शुरू हुआ, जिसे प्रशासन ने मरम्मत कराकर रोकने की कोशिश की। ग्रामीणों में दहशत है और निचले इलाकों का सड़क संपर्क टूटने का खतरा बढ़ गया है।फुलवारीशरीफ के धनकी गांव में महादलित टोला चारों तरफ पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गया है। वहीं पटना सिटी के पत्थर घाट और कंगन घाट की सड़कों पर पानी चढ़ गया है। वैशाली के राघोपुर स्थित सुकुमारपुर स्कूल का रास्ता भी बैकवॉटर से डूब गया है।
जलस्तर बढ़ने की रफ्तार हुई धीमी, लेकिन खतरा बरकरार
थोड़ी राहत जरूर मिली है। गुरुवार सुबह गंगा का जलस्तर दीघा और गांधी घाट पर दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था, जो सुबह आठ बजे के बाद घटकर एक सेंटीमीटर प्रति घंटा हो गया। इसकी बड़ी वजह इंद्रपुरी बराज से सोन नदी में पानी छोड़े जाने में कमी बताई गई है। बुधवार को जहां 5,63,654 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, वहीं गुरुवार शाम यह घटकर 4,10,076 क्यूसेक हो गया।फिर भी हालात बेहद नाजुक हैं। गंगा का पानी लाल निशान से ऊपर बह रहा है और शहर के कई हिस्सों में दस्तक दे चुका है। प्रशासन अलर्ट मोड में है, लेकिन नदी का मिजाज अगर फिर विकराल हुआ तो पटना के निचले इलाकों में संकट और गहरा सकता है।