बिहार के करीब 50% सांसदों पर आपराधिक मामले, सुप्रीम कोर्ट में राजनीति के अपराधीकरण पर आई बड़ी रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कुल 776 मौजूदा सांसदों में से 326 यानी करीब 45 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 सांसद और राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 सांसद आपराधिक मामलों का सामना कर रहे है
Bihar MPs criminal cases : बिहार के करीब 50 फीसदी मौजूदा सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र (Amicus Curiae) और वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने राजनीति के अपराधीकरण से जुड़े मामले में शीर्ष अदालत में एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की है। यह रिपोर्ट एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के आंकड़ों और विभिन्न हाईकोर्ट से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट में मौजूदा सांसदों के साथ-साथ पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों के तेजी से निपटारे की जरूरत बताई गई है।
14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 28 राज्यों में से 14 राज्यों के मौजूदा मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इस सूची में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सबसे ऊपर हैं। उनके खिलाफ 89 मामले दर्ज बताए गए हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से जुड़े आंकड़ों में 29 मामले, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ 19 और कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले बताए गए हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ 5, जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ 4-4 मामले दर्ज बताए गए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ एक मामला दर्ज है।
326 मौजूदा सांसदों पर आपराधिक मामले
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कुल 776 मौजूदा सांसदों में से 326 यानी करीब 45 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 सांसद और राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 सांसद आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें भी कई सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा के 170 सांसदों और राज्यसभा के 40 सांसदों पर ऐसे मामले हैं, जिनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है।
केरलम में सबसे ज्यादा सांसदों पर मामले
राज्यों के हिसाब से केरलम सबसे ऊपर है। वहां 20 में से 19 सांसद यानी 95 फीसदी आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें 11 सांसदों के खिलाफ गंभीर मामले हैं। तेलंगाना में 17 में से 14 यानी 82 फीसदी, ओडिशा में 21 में से 16 यानी 76 फीसदी, झारखंड में 14 में से 10 यानी 71 फीसदी और तमिलनाडु में 39 में से 26 यानी 67 फीसदी सांसदों पर आपराधिक मामले हैं।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में करीब आधे सांसद आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। वहीं गुजरात के 25 में से 5, मध्य प्रदेश के 29 में से 9, राजस्थान के 25 में से 4 और दिल्ली के 7 में से 3 सांसदों पर मामले दर्ज हैं।
4,192 मामले लंबित, रोजाना सुनवाई की मांग
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ देशभर की अदालतों में कुल 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं। वर्ष 2025 में 1,243 मामलों का निपटारा हुआ, जबकि इसी दौरान 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। विजय हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की विशेष अदालतों में रोजाना सुनवाई कराई जाए और एक साल के भीतर उनका अंतिम निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि सांसदों-विधायकों के लिए गठित विशेष अदालतें प्राथमिकता के आधार पर केवल इन्हीं मामलों की सुनवाई करें और इन मामलों के निपटारे के बाद ही दूसरे मामलों को लिया जाए। रिपोर्ट में इन मामलों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।