Political News: पेपर लीक के बाद बदला सियासी रण, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बली से थमा CJP आंदोलन, अब अयोध्या चढ़ावा विवाद पर विपक्ष की नजर, विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरने की ये रणनीति की है तैयार
Political News: पेपर लीक मुद्दे के शांत होने के बाद विपक्ष अपना राजनीतिक फोकस अब अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों की ओर मोड़ सकता है।
Political News: NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद थम गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही सियासी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया था। छात्रों के मुद्दे से शुरू हुआ आंदोलन देखते ही देखते केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का कारण बन गया।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ और उसी दिन CJP ने संसद मार्च का ऐलान किया था। मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के आरोपों के बाद विपक्ष ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। संसद के अंदर हंगामा बढ़ा और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।कांग्रेस ने साफ कर दिया था कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक पेपर लीक मामले पर सदन में चर्चा नहीं होगी। विपक्ष का तर्क था कि परीक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। इसके बाद केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता गया और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ आंदोलन का मुख्य मुद्दा खत्म हो गया।हालांकि अब सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ नया कदम उठाने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार सोमवार को संसद में पेपर लीक रोकने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्था से जुड़ा विधेयक पेश करने जा रही है। सरकार की कोशिश है कि इस मुद्दे पर विपक्ष के हमलों को जवाबदेही और सुधार के एजेंडे के जरिए कमजोर किया जाए।
अब अयोध्या मुद्दे पर सियासी घमासान के संकेत
पेपर लीक मुद्दे के शांत होने के बाद विपक्ष अपना राजनीतिक फोकस अब अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों की ओर मोड़ सकता है। मानसून सत्र से पहले विपक्ष ने अयोध्या मामले को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया था, लेकिन छात्र आंदोलन बड़ा होने के बाद राजनीतिक रणनीति बदल गई।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि सिर्फ शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि गृह मंत्री को भी जवाबदेही लेनी चाहिए। उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। अब विपक्ष इस मुद्दे को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर भी हमलावर हो सकता है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति को देखते हुए अयोध्या का मुद्दा आने वाले समय में और अहम हो सकता है। वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी दोनों राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में हैं।
हिंदू वोट बैंक की राजनीति में नया मोर्चा
अयोध्या राम मंदिर का मुद्दा बीजेपी की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में विपक्ष मंदिर से जुड़े विवादों को उठाकर सरकार को घेरने की रणनीति अपना सकता है। विपक्ष की कोशिश होगी कि वह धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछे और इसे प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़े। वहीं बीजेपी भी पलटवार की तैयारी में है। माना जा रहा है कि पेपर लीक पर चर्चा के बाद सरकार विपक्ष को घेरने के लिए पिछली सरकारों के दौरान हुई कथित अनियमितताओं का मुद्दा संसद में उठा सकती है।
सड़क से संसद तक बदला मुद्दा, लेकिन सियासी लड़ाई जारी
NEET पेपर लीक विवाद ने सरकार को संसद और सड़क दोनों जगह दबाव में ला दिया था। छात्रों के आंदोलन ने विपक्ष को एक मजबूत मुद्दा दिया और सरकार को राजनीतिक संतुलन साधने के लिए कदम उठाना पड़ा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से तत्काल संकट जरूर टल गया है, लेकिन सियासी संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। अब संसद में पेपर लीक कानून पर बहस के बाद मुकाबला अयोध्या मुद्दे पर केंद्रित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह उठाता है और सरकार इसका जवाब किस रणनीति से देती है।