पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने किराना हिल्स को किसने बनाया था निशाना, पूर्व CDS अनिल चौहान ने खोला ऑपरेशन सिंदूर का राज

Operation Sindoor: पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े एक अहम पहलू पर तस्वीर साफ करते हुए कहा कि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के किराना हिल्स को सीधे तौर पर निशाना नहीं बनाया था। ..

पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने को किसने बनाया था निशाना- फोटो : reporter

Operation Sindoor: पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े एक अहम पहलू पर तस्वीर साफ करते हुए कहा कि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के किराना हिल्स को सीधे तौर पर निशाना नहीं बनाया था। उन्होंने बताया कि सरगोधा की तरफ कई आत्मघाती ड्रोन भेजे गए थे और उनमें से कोई ड्रोन अपनी उड़ान क्षमता खोने के बाद नीचे गिरकर किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया हो सकता है। उनके इस बयान से उन दावों पर विराम लगता है, जिनमें कहा जाता रहा है कि भारत ने पाकिस्तान के कथित परमाणु प्रतिष्ठान वाले इलाके को निशाना बनाया था।जनरल चौहान ने 'ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात' विषय पर आयोजित बातचीत में एयर मार्शल एके भारती के पुराने बयान का भी समर्थन किया। एयर मार्शल भारती ने पिछले साल 12 मई को वायुसेना के वायु संचालन महानिदेशक (DGAO) के तौर पर पत्रकारों से कहा था कि भारत ने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया, चाहे वहां कुछ भी मौजूद रहा हो।

सरगोधा के आसपास रडार तलाशने का था मिशन

पूर्व CDS ने बताया कि ऑपरेशन से पहले भारतीय पक्ष ने सरगोधा की दिशा में कई ड्रोन भेजे थे। किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। उनके मुताबिक इन ड्रोन का मकसद सरगोधा और आसपास मौजूद रडार प्रणालियों को तलाशना था।चौहान ने बताया कि ऐसे ड्रोन की एक सीमित उड़ान अवधि होती है। करीब दो घंटे तक हवा में मंडराने के बाद यदि उन्हें निर्धारित लक्ष्य नहीं मिलता, तो वे नीचे गिर सकते हैं और किसी स्थान से टकरा सकते हैं। इसी संभावना के आधार पर उन्होंने कहा कि इनमें से कोई ड्रोन किराना की पहाड़ियों में जा टकराया हो सकता है।पाकिस्तानी मीडिया में किराना हिल्स से धुआं उठने वाली कुछ तस्वीरें सामने आने के बाद इस इलाके को लेकर तरह-तरह के दावे किए गए थे। चौहान ने संकेत दिया कि किसी ड्रोन के अनियंत्रित होकर पहाड़ी से टकराने की संभावना इन तस्वीरों की एक वजह हो सकती है।

पहलगाम हमले के बाद लिया गया बड़ा फैसला

जनरल चौहान े बातचीत के दौरान ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में हुई उच्चस्तरीय बैठकों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई थी। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे।चौहान के अनुसार इस बैठक में पाकिस्तान को कड़ा जवाब देने और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ बड़ा कदम उठाने पर फैसला हुआ। प्रधानमंत्री ने सेना को निर्देश दिया कि कार्रवाई का समय सेना खुद तय करे, लेकिन ऑपरेशन में विफलता की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत सुनिश्चित किए जाएं।

बहावलपुर को भी टारगेट लिस्ट में किया गया शामिल

पूर्व CDS के मुताबिक 29 अप्रैल की बैठक में बहावलपुर को भी लक्ष्यों की सूची में शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि नागरिकों को कम से कम नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से हमले के लिए रात का समय चुना गया था।चौहान ने कहा कि 23 से 29 अप्रैल के बीच सुरक्षा प्रतिष्ठान में कई दौर की बैठकें हुई थीं। चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी और NSA के साथ भी कई बैठकें हुईं और पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभिन्न विकल्पों पर मंथन किया गया।

मई 2025 में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। जनरल चौहान की ताजा टिप्पणी इस अभियान की रणनीति और उसके पीछे लिए गए फैसलों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने लाती है। खास तौर पर किराना हिल्स को लेकर उन्होंने साफ किया कि भारतीय सेना का घोषित निशाना वह इलाका नहीं था, बल्कि सरगोधा के आसपास मौजूद सैन्य रडार और संबंधित लक्ष्य अभियान का हिस्सा थे।