Ex President ADC: वर्दी का त्याग या फर्ज की जंग, पढ़िए राष्ट्रपति के पूर्व ADC मेजर ऋषभ सांब्याल के सनसनीखेज खुलासे

Ex President ADC: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी (ADC) मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल का सेना की नौकरी से महज 30 साल की उम्र में समय से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेना महज़ एक फैसला नहीं, बल्कि...

वर्दी का त्याग या फर्ज की जंग- फोटो : social Media

Ex President ADC:  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी (ADC) मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल का सेना की नौकरी से महज 30 साल की उम्र में समय से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेना महज़ एक फैसला नहीं, बल्कि एक कड़ा इंतिखाब था। देश के सर्वोच्च पद की शान बढ़ाने वाली वर्दी को अलविदा कहकर इस युवा फौजी ने जो दास्तान बयां की है, उसने हर किसी को जज़्बाती कर दिया है।

महज़ तीस बरस की उम्र में फौज की शानदार नौकरी को अलविदा कहने वाले मेजर ऋषभ ने खामोशी तोड़ते हुए साफ किया कि उनका यह कदम किसी शिकवे या मोहभंग का नतीजा नहीं था।

बचपन से जिस भारतीय सेना की वर्दी को उन्होंने अपना इकलौता मकसद माना था, उसे छोड़ना उनके लिए रूह को झकझोर देने वाला अनुभव था।एक दौर ऐसा आया जब उनकी जिंदगी दोराहे पर आ खड़ी हुई, जहाँ उन्हें देश की मुकद्दस सेवा और अपने माता-पिता के प्रति फ़र्ज़ में से किसी एक का चुनाव करना था।

उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा और फौजी करियर से ऊपर अपने बुजुर्ग मां-बाप को तरजीह दी, ताकि जिंदगी भर उन्हें यह मलाल न रहे कि जरूरत के वक्त वह अपनों के साथ नहीं थे।सोशल मीडिया पर चल रही उन तमाम अटकलों और अफवाहों पर भी विराम लग गया जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि उन्होंने किसी शादी या निजी रिश्तों के चलते यह कदम उठाया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के ADC के रूप में कड़े प्रोटोकॉल और जिम्मेदारियों के कारण उनकी निजी जिंदगी बेहद सीमित हो गई थी और इस महत्वपूर्ण ओहदे पर रहते हुए अकेलापन भी झेलना पड़ा।

मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने कहा कि यह फैसला मेरे लिए किसी बड़े इम्तिहान से कम नहीं था, लेकिन मैंने अपने स्वार्थ को दरकिनार कर अपने परिवार के हक में फैसला लिया।मेजर ऋषभ का यह वाकया महज़ एक फौजी का इस्तीफा नहीं है, बल्कि यह उस कश्मकश की दास्तान है जो हर उस शख्स के सामने आती है जिसे देश और अपनों के बीच किसी एक को चुनना पड़ता है। उनका यह त्याग यह सिखाता है कि कभी-कभी अपनों की खातिर अपने सबसे अजीज ख्वाबों की कुर्बानी देनी ही पड़ती है...