Union Budget 2026: इतिहास में पहली बार रविवार को बजट, आज 9वीं बार बजट पेश करेंगी निर्मला सीतारमण, रिकॉर्ड, रिवायत और राहत पर बजट की बिसात
Union Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी रविवार को संसद में देश का आम बजट पेश करेंगी और इसके साथ ही वह इतिहास के पन्नों में अपना नाम सुनहरे हर्फ़ों में दर्ज करा लेंगी।...
Union Budget 2026: नई दिल्ली की सत्ता की गलियों में एक बार फिर बजट की आहट गूंजने जा रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी रविवार को संसद में देश का आम बजट पेश करेंगी और इसके साथ ही वह इतिहास के पन्नों में अपना नाम सुनहरे हर्फ़ों में दर्ज करा लेंगी। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा, जिसमें एक अंतरिम बजट भी शामिल है। सियासी मायनों में यह महज़ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हुकूमत की स्थिरता, नीति की निरंतरता और सत्ता की मज़बूती का ऐलान है।
आज से करीब 78 साल पहले, 26 नवंबर 1947 को आज़ाद हिंदुस्तान का पहला बजट पेश हुआ था। तब वित्त मंत्री आर. के. षणमुखम चेट्टी ने संसद में मुल्क की आर्थिक तस्वीर रखी थी। उसके बाद से बजट देश की सियासत और अर्थव्यवस्था का सबसे अहम दस्तावेज़ बन गया। अब उसी कड़ी में निर्मला सीतारमण एक और नया अध्याय जोड़ने जा रही हैं।
रिकॉर्ड की बात करें तो बजट की दुनिया में मोरारजी देसाई अब भी सिरमौर हैं, जिन्होंने जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री की सरकारों में कुल 10 बार बजट पेश किया। पी. चिदंबरम ने नौ और प्रणब मुखर्जी ने आठ बार यह जिम्मेदारी निभाई। लेकिन लगातार बजट पेश करने के मामले में सीतारमण सब पर भारी पड़ती नज़र आ रही हैं। यह सिलसिला उन्हें सियासी इतिहास में अलग मुकाम देता है।
बजट भाषण की लंबाई भी हमेशा चर्चा में रही है। एक फरवरी 2020 को दो घंटे 40 मिनट का भाषण देकर सबसे लंबे बजट भाषण का रिकॉर्ड भी सीतारमण के नाम दर्ज है। वहीं, 1977 में हिरूभाई मुल्जीभाई पटेल का 800 शब्दों का अंतरिम बजट सबसे छोटा रहा। वक्त के साथ बजट की रिवायतें भी बदलीं—1999 से पहले शाम पांच बजे पेश होने वाला बजट यशवंत सिन्हा ने सुबह 11 बजे करना शुरू किया। 2017 से तारीख भी बदली और 28 फरवरी की जगह एक फरवरी ने ले ली।
इस बार का बजट भी कागज रहित होगा। याद दिला दें कि 2019 में सीतारमण ने चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटी पारंपरिक बही-खाता संस्कृति को वापस लाकर सियासी संदेश दिया था। खास बात यह भी है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार आम बजट रविवार को पेश किया जाएगा।
आम आदमी की निगाहें इस बजट पर टिकी हैं। मध्यम वर्ग महंगाई से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है, तो व्यापारी वर्ग टैक्स में नरमी की आस कर रहा है। सुबह 10.15 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल बजट को मंजूरी देगा, उसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को जानकारी दी जाएगी और फिर संसद में बजट की पेशकश होगी।
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक भारत की विकास दर को लेकर तस्वीर हौसला अफ़ज़ा है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है। ‘विकसित भारत 2047’ का ख्वाब इस बजट का मरकज़ रहने वाला है। युवा, किसान, महिला, गरीब और नौकरीपेशा वर्ग के लिए राहत और सुधारों का पिटारा खुल सकता है। अब देखना यह है कि यह बजट सियासी बयान बनता है या वाकई आम जनता की जिंदगी में सुकून की दस्तक देता है।