साफ हवा और करोड़ों की बचत: देश की पहली LNG-डीजल ट्रेन ने पटरी पर भरा फर्राटा, भारतीय रेलवे की नई 'सुपर' तकनीक तैयार

भारतीय रेलवे ने हरित ईंधन और लागत बचत की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अहमदाबाद डिवीजन द्वारा देश की पहली LNG-डीजल ड्यूल फ्यूल ट्रेन का सफल परीक्षण रेल संचालन के भविष्य को बदलने वाला कदम माना जा रहा है।

N4N Desk -  भारतीय रेलवे ने हरित ऊर्जा और लागत बचत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश की पहली LNG-डीजल ड्यूल फ्यूल ट्रेन का सफल परीक्षण किया है। पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन द्वारा किया गया यह नवाचार रेल संचालन के भविष्य के लिए क्रांतिकारी साबित होगा। 

देश की पहली LNG-डीजल हाइब्रिड ट्रेन का सफल परीक्षण

पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन ने डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) के ड्राइविंग पावर कार (DPC) में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आधारित दोहरे ईंधन प्रणाली को सफलतापूर्वक अपनाया है। अहमदाबाद के मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने 30 जनवरी 2026 को साबरमती डिपो में इस ट्रेन का निरीक्षण कर इसकी सफलता की पुष्टि की। इस परियोजना के तहत दो 1400 हॉर्सपावर वाली DMU कारों को संशोधित किया गया है, जिससे 40 प्रतिशत तक डीजल की जगह अब स्वच्छ LNG का इस्तेमाल संभव हो गया है। 

पर्यावरण संरक्षण और हवा की गुणवत्ता में सुधार

यह ड्यूल फ्यूल सिस्टम पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल है क्योंकि यह इंजन के उत्सर्जन में भारी कमी लाता है। विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$), नाइट्रोजन ऑक्साइड ($NO_x$) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) के स्तर को कम करके यह रेलवे लाइनों के आसपास हवा की गुणवत्ता में सुधार करेगा। यह तकनीक राष्ट्रीय पर्यावरण लक्ष्यों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी। 

रेलवे को होगा करोड़ों का आर्थिक लाभ

आर्थिक दृष्टिकोण से यह सिस्टम रेलवे के लिए बड़ा बचत का सौदा है, क्योंकि LNG डीजल की तुलना में काफी सस्ता ईंधन है। परीक्षण डेटा के अनुसार, एक ड्राइविंग पावर कार (DPC) से सालाना लगभग ₹11.9 लाख और पूरे 8-कोच वाले DMU रेक से सालाना ₹23.9 लाख की बचत होने का अनुमान है।  इंजन की शक्ति और विश्वसनीयता पारंपरिक इंजनों जैसी ही बनी रहती है, जो दक्षता को प्रभावित किए बिना खर्च कम करती है। 

एक बार गैस भरने पर 2200 किलोमीटर का सफर

इस ट्रेन में 2200 लीटर की क्षमता वाला विशाल LNG टैंक लगाया गया है, जिसमें लगभग 1000 किलोग्राम गैस स्टोर की जा सकती है। पूरी तरह टैंक भरने पर यह ट्रेन 2200 किलोमीटर तक का दैनिक संचालन करने में सक्षम है, जिससे बार-बार ईंधन भरने की समस्या खत्म हो जाएगी। ये संशोधित ट्रेनें पहले ही 2000 किलोमीटर से अधिक का फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी हैं और अब नियमित यात्री सेवाओं में बिना किसी तकनीकी समस्या के चल रही हैं।