Keralam CM oath: केरलम् में नई सरकार का गठन, सतीशन ने 20 मंत्रियों के साथ ली सीएम पद की शपथ, राहुल-प्रियंका समेत जिसे सत्ता से किया था बेदखल उसी के नेता पहुंचे शपथ समारोह में, दी बधाई
Keralam CM oath: केरलम् की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और यादगार क्षण दर्ज हुआ, जब कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।
Keralam CM oath:केरलम् की सरज़मीं पर आज भारतीय लोकतंत्र ने एक ऐसा नज़ारा पेश किया, जिसने सियासत के पुराने तमाम कड़वे पन्नों को पलटकर सुलह, संयम और शिष्टाचार की नई इबारत लिख दी। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने केरलम् के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, और इसी के साथ राज्य की राजनीति में एक नया सियासी अध्याय शुरू हो गया।
राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई, जिसके बाद उनके साथ मंत्रिमंडल के 20 अन्य सदस्यों ने भी एक साथ शपथ ग्रहण किया। राजनीतिक गलियारों में इसे 60 साल बाद का दुर्लभ सियासी संयोग कहा जा रहा है, क्योंकि 1962 के बाद पहली बार केरल में पूरी कैबिनेट ने एक साथ शपथ ली है।
इस ऐतिहासिक मौके पर देश की सियासत के बड़े चेहरे एक मंच पर नजर आए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी ने इस समारोह को राष्ट्रीय राजनीतिक रंग दे दिया। वहीं, विपक्षी खेमे से पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी कार्यक्रम में पहुंचे, जिसने राजनीतिक कटुता की जगह लोकतांत्रिक मर्यादा का संदेश दिया।
सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि चुनावी हार-जीत की तल्ख़ियों के बावजूद पिनराई विजयन का स्वागत नए मुख्यमंत्री सतीशन ने खुद आगे बढ़कर किया। यह दृश्य किसी राजनीतिक औपचारिकता से कहीं आगे जाकर सियासी तहज़ीब का प्रतीक बन गया। दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी से हाथ मिलाना और एक-दूसरे के लिए सम्मान का भाव पूरे स्टेडियम में तालियों की गूंज बन गया।कार्यक्रम में राजीव चंद्रशेखर समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी मौजूद रहे, जबकि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस ऐतिहासिक आयोजन के गवाह बने।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह शपथ ग्रहण समारोह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कारों के पुनर्जागरण का प्रतीक है। जहां आमतौर पर सत्ता परिवर्तन के बाद आरोप-प्रत्यारोप, बदले की राजनीति और कटु बयानबाज़ी देखने को मिलती है, वहीं केरल में सत्ता हस्तांतरण ने एक अलग ही मिसाल कायम की है।
सूत्रों के मुताबिक, सतीशन सरकार का फोकस अब प्रशासनिक सुधार, सामाजिक समरसता और विकास के एजेंडे पर रहेगा। वहीं विपक्ष ने भी संकेत दिया है कि वह रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।इस पूरे घटनाक्रम ने केरल की राजनीति को एक नई पहचान दी है जहां विरोधी भी मंच साझा कर सकते हैं, और हार-जीत के बाद भी हाथ मिलाना कमजोरी नहीं बल्कि लोकतंत्र की ताकत माना जाता है। बहरहाल यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ सत्ता का हस्तांतरण नहीं था, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस सुनहरी तहज़ीब का प्रदर्शन था, जिसमें मतभेद होते हैं मगर मनभेद नहीं।