औरंगाबाद में पर्यावरण दिवस पर प्रधान जिला जज की अनूठी पहल : दिव्यांग महिला कर्मी से कराया वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में एक बेहद प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला। जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजीव रंजन कुमार ने सभी न्यायिक अधिकारियों की

औरंगाबाद में पर्यावरण दिवस पर प्रधान जिला जज की अनूठी पहल- फोटो : दीनानाथ मौआर

Aurangabad : विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर औरंगाबाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में व्यवहार न्यायालय परिसर में एक वृहत वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष श्री राजीव रंजन कुमार समेत न्यायालय के सभी माननीय न्यायाधीशों ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रधान जिला जज ने न्यायालय में कार्यरत एक दिव्यांग महिला कर्मचारी अंकिता के साथ मिलकर पौधा रोपा, जो पूरे समाज के लिए समावेशन और संवेदनशीलता की एक अद्भुत मिसाल बन गया है।


दिव्यांग समाज का सशक्त हिस्सा, किसी से कम नहीं: प्रधान जिला जज

वृक्षारोपण के बाद उपस्थित जनसमूह और न्यायिक कर्मियों को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजीव रंजन कुमार ने दिव्यांगों के प्रति समाज का नजरिया बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग मनुष्य किसी भी स्थिति में एक आम इंसान से अलग या कमजोर नहीं है। इसके विपरीत, वे मानसिक रूप से कहीं अधिक मजबूत, दृढ़ संकल्पी और सशक्त होते हैं। अंकिता के हाथों पौधा लगवाकर उन्होंने समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया कि हर बड़े और पवित्र कार्य में दिव्यांगों की भागीदारी उतनी ही महत्वपूर्ण है।


पर्यावरण और जीवन का अटूट संबंध, संरक्षण का संकल्प जरूरी

प्रधान जिला जज ने पर्यावरण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जीवन और प्रकृति का संबंध बेहद अटूट है। केवल एक दिन पर्यावरण दिवस मना लेना काफी नहीं है, बल्कि आज के दिन हम सभी को प्रकृति के संरक्षण, संवर्धन और विकास का वास्तविक संकल्प लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज हमारे आस-पास जो हरियाली और छाया दिख रही है, वह हमारे पूर्वजों द्वारा लगाए गए वृक्षों की ही देन है, जिसका आनंद हम आज ले रहे हैं।


आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने के लिए निभाएं अपना कर्तव्य

न्यायाधीश ने आगे कहा कि पूर्वजों की इस अनमोल धरोहर को सहेजने और आगे बढ़ाने का दायित्व अब इस पीढ़ी के प्रत्येक व्यक्ति के कंधों पर है। यदि हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाए और कम से कम एक पौधा लगाए, तो हम पर्यावरण को स्थिर और संतुलित रख पाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज किया गया यह छोटा सा प्रयास आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ और समृद्ध भविष्य की नींव रखेगा।


अंकिता ने जताया आभार, आम जनता से की पेड़ लगाने की अपील

इस गरिमामयी और ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने पर न्यायालय की दिव्यांग कर्मचारी अंकिता बेहद भावुक और गौरवान्वित नजर आईं। इस विशेष अवसर को प्रदान करने के लिए उन्होंने माननीय प्रधान जिला जज के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही अंकिता ने समाज के सभी वर्गों और आम नागरिकों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण की रक्षा के लिए आगे आएं और अपनी तरफ से कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाएं ताकि हमारी धरती हरी-भरी बनी रहे।


दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट