Bihar News : सबौर कृषि विश्वविद्यालय नियुक्ति घोटाला का लोकभवन ने लिया संज्ञान, सांसद सुधाकर सिंह से 15 दिनों में मांगे साक्ष्य और शपथ-पत्र
Bihar News : बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर में हुए कथित भर्ती घोटाले और वित्तीय गड़बड़ियों का मामला अब लोकभवन के दरबार में पहुंच गया है.....पढ़िए आगे
BANKA : बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में कथित अवैध नियुक्तियों और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे सवाल अब सीधे लोकभवन तक पहुंच गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल सचिवालय ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्रारंभिक कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार द्वारा भेजे गए आधिकारिक पत्र में शिकायतकर्ता एवं बक्सर सांसद सुधाकर सिंह से आरोपों के समर्थन में आवश्यक साक्ष्य, दस्तावेज तथा निर्धारित प्रारूप में आश्वासन-पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया है। राजभवन ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सांसद सुधाकर सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी की गई। शिकायत में प्रशासनिक पदाधिकारी, सहायक कुलसचिव, विषय-वस्तु विशेषज्ञ, सहायक प्राध्यापक, निदेशक कार्य एवं संयंत्र सहित लगभग 350 पदों पर नियुक्तियों में गंभीर अनियमितता और पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बावजूद संबंधित मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी आधार पर सांसद ने राजभवन से हस्तक्षेप कर उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की थी।
राजभवन की ओर से जारी पत्र में बिहार सरकार के प्रचलित नियमों का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता को 15 दिनों के भीतर यह लिखित आश्वासन देने को कहा गया है कि वे लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। इसके बाद ही मामले को अगले चरण में ले जाया जाएगा।राजभवन के इस कदम के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो विश्वविद्यालय के कई अधिकारियों और पूर्व पदाधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यपाल सचिवालय द्वारा संज्ञान लिए जाने से यह मामला अब केवल प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रस्तुत होने वाले साक्ष्य इस पूरे मामले की तस्वीर साफ करेंगे।
चंद्रशेखर भगत की रिपोर्ट