Bihar News : बेतिया में मगरमच्छों के आतंक के बीच ग्रामीणों ने की अनोखी मिसाल, चंदा जुटाकर भपसा नहर पर रातों-रात बनाया चचरी पुल
Bihar News : बेतिया में मगरमच्छों के हमले से कई लोग जख्मी हो गये. जिसके बाद खुद लोगों ने चंदा देकर नहर पर चचरी पुल बना दिया......पढ़िए आगे
BETTIAH : पश्चिम चंपारण जिले के नौरंगिया थाना क्षेत्र स्थित सिरिसिया से गुजरने वाली भपसा नहर में मगरमच्छों के लगातार हमलों से सहमे ग्रामीणों ने एकता और आत्मनिर्भरता की एक अनोखी मिसाल पेश की है। पिछले 10 दिनों के भीतर मगरमच्छ के हमले में एक किसान की मौत और एक महिला के गंभीर रूप से घायल होने की घटना के बाद, ग्रामीणों ने प्रशासन का इंतजार किए बिना खुद ही पहल की। सिस्टम की उपेक्षा से थक चुके स्थानीय लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान करके नहर के ऊपर रातों-रात बांस का एक चचरी पुल बनाकर तैयार कर दिया।
इलाके में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गंडक नदी का पानी भपसा नहर समेत आसपास के नालों और छोटी नदियों में फैल गया है, जिसके साथ कई खूंखार मगरमच्छ रिहायशी इलाकों में आ पहुंचे हैं। नहर में कमर तक पानी भरा होने के बावजूद किसानों को अपनी धान की फसल की रोपाई और देखभाल के लिए हर रोज जान जोखिम में डालकर इसे पार करना पड़ता था। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब आवाजाही का कोई सुरक्षित साधन नहीं मिला, तो ग्रामीणों ने खुद ही बांस का कच्चा पुल बनाने का निर्णय लिया।
इस क्षेत्र में मगरमच्छों का खौफ तब और गहरा गया जब बीते 20 जुलाई को नहर पार कर रहे केदार बैठा नामक किसान को मगरमच्छ ने अपना शिकार बना लिया था। इसके बाद रविवार की सुबह भी एक महिला पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गई। लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद आक्रोशित और भयभीत ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी। चूंकि बरसात और बाढ़ के मौसम में तुरंत पक्के पुल का निर्माण संभव नहीं था, इसलिए विधायक की सलाह और आर्थिक सहयोग से यह अस्थायी समाधान निकाला गया।
ग्रामीणों के इस अभियान में वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा और गुड्डू ठेकेदार ने भी महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की। विधायक के मार्गदर्शन और ग्रामीणों के अटूट श्रमदान से महज एक दिन के भीतर भपसा नहर पर आवागमन योग्य चचरी पुल बनकर तैयार हो गया। इस पुल के बन जाने से अब सैकड़ों किसानों और राहगीरों को जानलेवा पानी के बीच से गुजरने से मुक्ति मिल गई है, जिससे पूरे क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है।
मामले पर वन विभाग का कहना है कि 20 जुलाई की घटना के बाद मगरमच्छ को पकड़ने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर लोगों से नहर से दूर रहने की अपील की जा रही थी। विभाग के अनुसार, पूरी प्रक्रिया के बाद मृतक किसान के आश्रितों को नियमानुसार ₹10 लाख का मुआवजा मुहैया कराया जाएगा, जबकि घायल महिला के इलाज के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी। फिलहाल, ग्रामीणों द्वारा अपने दम पर निर्मित यह चचरी पुल पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आशीष की रिपोर्ट