Bhagalpur encounter case: एनकाउंटर या कस्टडी किलिंग? सुल्तानगंज कांड में उठे बड़े सवाल, परिवार बोला-थाने में मारी गई रामधनी यादव को गोली

Bhagalpur encounter case:रामधनी यादव एनकाउंटर ने अब सियासी और प्रशासनिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है।...

एनकाउंटर या कस्टडी किलिंग? - फोटो : reporter

Bhagalpur encounter case: बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में हुए चर्चित रामधनी यादव एनकाउंटर ने अब सियासी और प्रशासनिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। जहां पुलिस इसे मुठभेड़ बता रही है, वहीं मृतक के परिजन इसे हिरासत में हत्या करार देते हुए गंभीर इल्ज़ाम लगा रहे हैं। इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्रवाई और एनकाउंटर की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, कुख्यात अपराधी रामधनी यादव को मुठभेड़ में मार गिराया गया, जो नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी हत्याकांड का मुख्य आरोपी था। लेकिन घटना के 48 घंटे बाद भी पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर पा रही कि मुठभेड़ आखिर किस सटीक स्थान पर हुई। अधिकारियों के गोलमोल जवाबों ने शक को और गहरा कर दिया है।

मामले में नया मोड़ तब आया जब मृतक की बहू बेबी कुमारी सामने आईं और उन्होंने पूरी कहानी पर सवाल खड़े कर दिए। उनका दावा है कि पुलिस ने सुबह करीब 4 बजे उन्हें घर से उठाकर थाने में नजरबंद कर दिया था। परिवार को बचाने के लिए रामधनी यादव खुद सुबह 5 बजे थाने पहुंचे और आत्मसमर्पण की बात कही।

परिजनों का आरोप है कि उस समय रामधनी यादव निहत्थे थे, लेकिन थाने के भीतर उनके साथ मारपीट की गई और फिर पीछे ले जाकर गोली मार दी गई। बेबी कुमारी का कहना है कि घटना के दौरान थाने के CCTV कैमरे भी बंद कर दिए गए थे, जिससे पूरी कार्रवाई संदिग्ध हो गई है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर आरोपी पुलिस हिरासत में था और उसके पास कोई हथियार नहीं था, तो फिर मुठभेड़ की कहानी कैसे बनी? शव सौंपते वक्त भी पुलिस इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी कि हिरासत में मौजूद व्यक्ति मुठभेड़ स्थल तक कैसे पहुंचा। परिवार का यह भी आरोप है कि मामले को दबाने के लिए उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने कानून-व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है क्या यह सच में एनकाउंटर था या फिर कहानी कुछ और है? फिलहाल सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि इस केस ने पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

रिपोर्ट - अंजनी कुमार कश्यप