गंगा के रौद्ररुप से लोग कर रहे त्राहिमाम, भागलपुर में बढ़ रहा लगातार जलस्तर, बाढ़ से पहले नाव बनाने में जुटे ग्रामीण
Bihar Flood News: भागलपुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।...
Bihar Flood News: भागलपुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। संभावित बाढ़ की आशंका को देखते हुए लोग अभी से तैयारी में जुट गए हैं। खासकर सबौर प्रखंड की रजनदीपुर पंचायत के संत नगर गांव में कई परिवार लकड़ी की नाव बनाने का काम तेजी से कर रहे हैं, ताकि बाढ़ आने की स्थिति में आवागमन, राहत और आजीविका की समस्या से निपटा जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ उनके जीवन का हिस्सा बन जाती है। ऐसे में नाव उनके लिए केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि जीवनरक्षक और रोज़गार का प्रमुख माध्यम भी है। बाढ़ के दौरान यही नाव लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने, खाद्यान्न और जरूरी सामान ढोने, बीमारों को अस्पताल पहुंचाने तथा अन्य लोगों को नदी पार कराने के काम आती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक मजबूत लकड़ी की नाव तैयार करने में करीब 4 से 5 लाख रुपये तक का खर्च आता है। महंगी लकड़ी, मजदूरी और अन्य सामग्री की बढ़ती कीमतों के कारण नाव बनाना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। इसके बावजूद ग्रामीण हर साल यह खर्च उठाने को मजबूर हैं, क्योंकि बाढ़ के समय यही नाव उनके परिवार की सुरक्षा और आय का सबसे बड़ा सहारा बनती है।
संत नगर के ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बाढ़ का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। इसलिए वे समय रहते नाव तैयार कर लेना चाहते हैं, ताकि आपदा आने पर किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। कई परिवार सामूहिक रूप से भी नाव तैयार करा रहे हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर पूरे गांव के लोग इसका उपयोग कर सकें।
ग्रामीणों ने प्रशासन से भी समय रहते बाढ़ सुरक्षा के इंतजाम, राहत सामग्री, ऊंचे स्थानों पर शरण शिविर और नावों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष बाढ़ से जनजीवन प्रभावित होता है, इसलिए पूर्व तैयारी और प्रशासनिक सहयोग से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल गंगा के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है, जबकि तटवर्ती इलाकों के लोग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।