Bihar News : भागलपुर तिनटंगा घाट पर रामभरोसे सरकारी राजस्व की वसूली, जहाजों की संख्या और ट्रकों की गिनती का कोई रिकॉर्ड नहीं, अफसरों ने साधी चुप्पी
Bihar News : भागलपुर के तिनटंगा घाट पर राजस्व की वसूली रामभरोसे हैं. यहाँ चलनेवाली मालवाहक जहाजों का कोई रिकॉर्ड अधिकारियों के पास नहीं है.........पढ़िए आगे
BHAGALPUR : भागलपुर में विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने के बाद जिले की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगने से व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन ने कहलगांव के तिनटंगा करारी जहाज घाट से मालवाहक जहाजों के परिचालन की अनुमति दी, ताकि गंगा के एक किनारे से दूसरे किनारे तक ट्रकों और अन्य भारी वाहनों का आवागमन जारी रह सके। जानकारी के अनुसार, जहाज संचालन से होने वाली आय में 70 प्रतिशत राशि जहाज संचालकों तथा 30 प्रतिशत राजस्व सरकार के खाते में जाने का प्रावधान किया गया था। उस समय एक जहाज से परिचालन शुरू हुआ था। प्रशासन द्वारा लोडेड मालवाहक ट्रक को पार कराने का शुल्क 5,000 रुपये तथा खाली ट्रक के लिए 2,500 रुपये निर्धारित किया गया था। साथ ही, जहाज संचालन के लिए शाम 5 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था।
हालांकि, वर्तमान स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि अब घाट पर कई मालवाहक जहाजों का परिचालन हो रहा है और शाम 6:56 बजे तक भी जहाज चलते देखे गए, जबकि निर्धारित समय शाम 5 बजे तक का बताया गया था। इस संबंध में जब अंचल नाजिर ललन कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने पहले बताया कि 7 से 8 मालवाहक जहाज संचालित हो रहे हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने यह कहते हुए विस्तृत जानकारी देने से फिलहाल असमर्थता जताई कि वह बाइक चला रहे हैं और बाद में जानकारी देंगे। वहीं अंचलाधिकारी रौशन कुमार से इस विषय में जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि *केवल चार मालवाहक जहाज* ही संचालित हो रहे हैं। जब उनसे वास्तविक संख्या और निगरानी व्यवस्था के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी लेकर बाद में बताएंगे।
सूत्रों के अनुसार, एक जहाज दोनों किनारों के बीच प्रतिदिन लगभग छह चक्कर लगाता है, जिससे प्रतिदिन सरकार के राजस्व में लाखों रुपये की बढ़ोतरी होने की संभावना है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस राजस्व का वास्तविक आकलन कैसे किया जाता है। जब अंचलाधिकारी से पूछा गया कि घाट पर वाहनों की संख्या दर्ज करने और निगरानी के लिए क्या कोई सरकारी कर्मी तैनात रहता है, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि अंचल की ओर से किसी भी सरकारी कर्मी की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई है। इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि वास्तविक वाहनों की संख्या का सत्यापन किए बिना सरकार का राजस्व किस आधार पर निर्धारित किया जाता है, तो उन्होंने बताया कि जहाज संचालकों द्वारा उपलब्ध कराई गई रसीदों के आधार पर राजस्व लिया जाता है। इस पर जब यह सवाल किया गया कि यदि जहाज संचालक कम रसीद काटकर सरकार के राजस्व की चोरी करें तो उसकी जांच या रोकथाम कैसे होगी, तो इस संबंध में उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। मामले की विस्तृत जानकारी लेने के लिए जिला आपदा पदाधिकारी कुंदन कुमार को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। वहीं वरीय उप समाहर्ता दिनेश राम से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु उन्होंने भी फोन रिसीव नहीं किया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व से जुड़ा यह परिचालन हो रहा है, तब जहाजों की वास्तविक संख्या, वाहनों की गिनती और सरकारी राजस्व की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रभावी निगरानी व्यवस्था क्यों नहीं है?* यदि घाट पर सरकारी कर्मी की तैनाती नहीं है, तो सरकार के हिस्से का राजस्व सही तरीके से जमा हो रहा है या नहीं, यह भी जांच का विषय बन गया है।
बालमुकुन्द की रिपोर्ट