विक्रमशिला सेतु मरम्मत पर बड़ा अपडेट: सांसद अजय मंडल ने डीएम को लिखा पत्र, त्योहारों के बाद काम शुरू करने की मांग

भागलपुर के महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु की प्रस्तावित मरम्मत को लेकर सांसद अजय कुमार मंडल ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।सांसद ने आग्रह किया है कि सितंबर से नवंबर तक आने वाले दुर्गापूजा, दीपावली और छठ महापर्व के दौरान कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लाखों

भागलपुर सांसद ने की अपील- दुर्गापूजा और छठ के बाद ही शुरू हो विक्रमशिला पुल की मरम्मत- फोटो : Reporter

भागलपुर के सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग विक्रमशिला सेतु की प्रस्तावित मरम्मत और स्थायी निर्माण कार्य को लेकर भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ी पहल की है। उन्होंने जिलाधिकारी को एक पत्र लिखकर पुल पर मरम्मत कार्य शुरू करने के तय समय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। सांसद का कहना है कि बाढ़, बारिश और आगामी बड़े त्योहारों के खत्म होने के बाद ही यह कार्य शुरू कराया जाना जनहित में पूरी तरह से उचित होगा।


अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है विक्रमशिला सेतु

सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि विक्रमशिला सेतु केवल भागलपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों को आपस में जोड़ने वाली एक मुख्य जीवनरेखा है। इस पुल से होकर रोजाना हजारों की संख्या में विद्यार्थी, गंभीर मरीज, किसान, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और आम नागरिक आवागमन करते हैं। ऐसे में अगर मरम्मत कार्य के लिए पुल पर यातायात को बंद या अत्यधिक सीमित कर दिया जाता है, तो पूरे क्षेत्र की रफ्तार थम जाएगी और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

पर्व-त्योहारों के दौरान बढ़ेगा यात्रियों का आवागमन

अपने पत्र में सांसद ने सितंबर से नवंबर के बीच आने वाले प्रमुख त्योहारों जैसे दुर्गापूजा, दीपावली, भाईदूज और लोकआस्था के महापर्व छठ का विशेष रूप से उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि इन महीनों में भागलपुर, नवगछिया, कोसी और सीमांचल क्षेत्र के बीच आम लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। यदि ऐसे संवेदनशील समय में पुल पर निर्माण कार्य शुरू कर यातायात रोका गया, तो लाखों लोगों के सामने भीषण संकट खड़ा हो जाएगा।

आपातकालीन सेवाओं और व्यापार पर पड़ेगा प्रतिकूल असर

सांसद ने आशंका जताई है कि विक्रमशिला सेतु बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों पर अचानक गाड़ियों का अत्यधिक दबाव बढ़ जाएगा। इससे सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लगेगा और लोगों को समय की बर्बादी झेलनी पड़ेगी। सबसे गंभीर स्थिति यह होगी कि एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं का संचालन बाधित हो जाएगा। इसके साथ ही कृषि उपज के परिवहन, स्कूली बच्चों की पढ़ाई और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका सीधा व नकारात्मक असर पड़ेगा।


जिला दिशा समिति की बैठक के सुझाव का दिया हवाला

अपने इस पत्र में सांसद अजय कुमार मंडल ने 18 जुलाई 2026 को आयोजित हुई भागलपुर जिला दिशा समिति की बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस बैठक के दौरान ही उन्होंने विक्रमशिला सेतु की स्थिति पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को सुझाव दिया था कि वर्तमान में गंगा नदी के बढ़े जलस्तर, बरसात के मौसम और दैनिक यातायात के दबाव को देखते हुए पुल के काम को फिलहाल कुछ समय के लिए स्थगित रखना चाहिए।


गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ समय का चयन भी जरूरी

सांसद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और इसका स्थायी निर्माण बेहद जरूरी है। पुल की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। लेकिन इसके साथ-साथ निर्माण कार्य को अंजाम देने के लिए सही समय का चुनाव करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि सरकार का काम भी पूरा हो जाए और आम जनता को किसी तरह की असुविधा या जान-माल का खतरा न उठाना पड़े।


गंगा का जलस्तर घटने और पर्व खत्म होने पर शुरू हो काम

जिलाधिकारी से पुरजोर अपील करते हुए सांसद ने अनुरोध किया है कि प्रस्तावित मरम्मत कार्य और उससे जुड़ी अस्थायी यातायात व्यवस्था पर पुनर्मूल्यांकन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट मांग की है कि जब गंगा का जलस्तर पूरी तरह सामान्य हो जाए, मानसून की बारिश खत्म हो जाए और छठ महापर्व के बाद भीड़ भाड़ घट जाए, तभी सेतु पर मरम्मत का काम शुरू कराने की आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


सांसद के पत्र से प्रशासनिक हलके में हलचल तेज

भागलपुर सांसद द्वारा जिलाधिकारी को भेजा गया यह पत्र अब प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। आम जनता इसे जनहित में उठाई गई एक बेहद दूरदर्शी और सराहनीय पहल मान रही है। इस पत्र के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जिला प्रशासन विक्रमशिला सेतु पर काम शुरू करने की तिथियों और नई रूट डायवर्जन योजना को लेकर जल्द ही कोई व्यावहारिक निर्णय ले सकता है।

भागलपुरसे बालमुकुन्द की रिपोर्ट