बक्सर में 'विद्रोही' प्रकरण पर आर-पार: पार्टी से निष्कासन के बाद भी दुर्गेश उपाध्याय के साथ खड़े दिखे स्थानीय भाजपा नेता
भाजपा क्रीड़ा मंच के निवर्तमान जिला संयोजक दुर्गेश उपाध्याय उर्फ 'विद्रोही' के खिलाफ हुई पुलिसिया कार्रवाई ने अब बक्सर की सियासत में एक नया उबाल ला दिया है।बक्सर के स्थानीय भाजपा और जदयू नेताओं का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल खुलकर उनके समर्थन में उतर आया
Buxar : भाजपा क्रीड़ा मंच के निवर्तमान जिला संयोजक दुर्गेश उपाध्याय उर्फ 'विद्रोही' के खिलाफ हुई पुलिसिया कार्रवाई ने अब बक्सर की सियासत में एक नया उबाल ला दिया है। मद्य निषेध कानून के तहत पुलिस द्वारा दर्ज मामले के बाद जहां एक तरफ प्रदेश भाजपा क्रीड़ा प्रकोष्ठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पदमुक्त कर प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ बक्सर के स्थानीय भाजपा और जदयू नेताओं का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल खुलकर उनके समर्थन में उतर आया है। इस घटनाक्रम से प्रदेश संगठन के फैसले और स्थानीय नेतृत्व की सोच के बीच का विरोधाभास साफ उजागर हो गया है।
अनुशासनहीनता के आरोप में प्रदेश नेतृत्व ने की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश भाजपा क्रीड़ा प्रकोष्ठ द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया कि दुर्गेश उपाध्याय पार्टी की नीति, रीति और सिद्धांतों के विपरीत गतिविधियों में संलिप्त पाए गए हैं। इसी आधार पर उन्हें न केवल जिला संयोजक के पद से मुक्त किया गया, बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया। प्रदेश संगठन ने बक्सर के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश जारी किया है कि वे निष्कासित नेता से संगठनात्मक स्तर पर किसी भी प्रकार का संपर्क न रखें।
एनडीए नेताओं का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा घर, न्याय के लिए संघर्ष का ऐलान
इस बीच, बक्सर में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदले हुए नजर आए। भाजपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष सह बीस सूत्री उपाध्यक्ष विजय कुमार सिंह उर्फ भोला सिंह और जदयू जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा के संयुक्त नेतृत्व में एनडीए के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सीधे दुर्गेश उपाध्याय के आवास पर पहुंच गया। इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व जिलाध्यक्ष राजवंश सिंह और युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष सौरभ तिवारी भी शामिल थे। नेताओं ने उपाध्याय से विस्तृत बातचीत के बाद सार्वजनिक रूप से कहा कि उनके साथ सरासर अन्याय हुआ है और पूरा भाजपा परिवार इस संकट में उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
वाहन जांच के दौरान गिरफ्तारी, पुलिस ने मद्य निषेध कानून का दिया हवाला
पूरे विवाद की जड़ नगर थाना क्षेत्र के नया बाजार में हुई एक पुलिसिया कार्रवाई से जुड़ी है। नगर थाना प्रभारी मनोज कुमार के अनुसार, पुलिस टीम द्वारा किए जा रहे नियमित वाहन चेकिंग अभियान के दौरान दुर्गेश उपाध्याय को हिरासत में लिया गया था। पुलिस का दावा है कि जांच के समय वे शराब के नशे में धुत थे और मौके पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से उलझते हुए हंगामा कर रहे थे। बाद में कराई गई मेडिकल जांच में शराब सेवन की पुष्टि होने का दावा करते हुए पुलिस ने बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत उन पर कानूनी शिकंजा कसा है।
थाना प्रभारी से पुरानी बहस का बदला? दुर्गेश ने बताया सोची-समझी साजिश
दूसरी ओर, दुर्गेश उपाध्याय उर्फ 'विद्रोही' ने पुलिस द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत और बेबुनियाद करार दिया है। उन्होंने इसे स्थानीय पुलिस की एक सोची-समझी साजिश बताते हुए कहा कि गत 28 मई को वे एक गरीब असहाय व्यक्ति की मदद के लिए नगर थाना गए थे, जहां उनकी थाना प्रभारी से तीखी बहस हो गई थी। उपाध्याय का आरोप है कि उसी पुरानी रंजिश और खुन्नस का बदला लेने के लिए उन्हें इस झूठे और अपमानजनक मामले में फंसाया जा रहा है। बक्सर के राजनीतिक गलियारों में अब इस बात पर चर्चा तेज है कि प्रदेश नेतृत्व अपने ही स्थानीय नेताओं के इस बागी रुख पर क्या एक्शन लेता है।
संदीप वर्मा की रिपोर्ट