गुलदस्ता लेकर DM-SSP को ठगने पहुंचा 'फर्जी IAS', जिलाधिकारी ने बीच बातचीत में ही भिजवा दिया जेल

मेरठ में तैनात आईएएस अधिकारी बताने वाला एक युवक जिलाधिकारी और एसएसपी से मिलने जा पहुंचा। पहले तो उसने एसएसपी को गुलदस्ता भेंट कर प्रभावित किया, लेकिन जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की तीखी पूछताछ के सामने उसकी पोल खुल गई।

Chhapra - सारण समाहरणालय में सोमवार को उस समय अफरातफरी का माहौल बन गया, जब एक युवक खुद को आईएएस (IAS) अधिकारी बताकर जिले के आला अधिकारियों से मिलने पहुँच गया। पकड़े गए युवक की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बसाढ़ी गांव निवासी कृष्णा पंडित के पुत्र रितेश कुमार के रूप में हुई है। वह अपने भाई मुन्ना पंडित के साथ समाहरणालय पहुँचा था और बड़े ही आत्मविश्वास के साथ अधिकारियों के कक्ष में दाखिल हुआ, लेकिन उसकी सच्चाई सामने आते ही उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

गुलदस्ता भेंट कर SSP को झांसे में लेने की कोशिश 

जानकारी के अनुसार, रितेश कुमार सबसे पहले वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) विनीत कुमार से मिला। वहाँ उसने खुद को उत्तर प्रदेश के मेरठ में तैनात एक आईएएस अधिकारी बताया और उन्हें गुलदस्ता भेंट किया। एसएसपी से मिलने के बाद उसका हौसला और बढ़ गया और वह इसी फर्जी पहचान के साथ जिलाधिकारी (DM) वैभव श्रीवास्तव से मिलने उनके चैंबर में जा पहुँचा। युवक का इरादा अधिकारियों से नजदीकी दिखाकर स्थानीय लोगों पर अपना दबदबा कायम करना था।

डीएम की पूछताछ में खुली पोल, नहीं दे पाया सवालों के जवाब 

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जब युवक से शिष्टाचार मुलाकात के दौरान सामान्य बातचीत शुरू की, तो उन्हें उसके व्यवहार पर संदेह होने लगा। डीएम ने जब प्रशासनिक कामकाज और सेवा से जुड़े कुछ सवाल पूछे, तो कथित 'साहब' बगले झांकने लगे और किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। संदेह गहराने पर डीएम ने तत्काल अपर पुलिस अधीक्षक राम पुकार सिंह को बुलाया और युवक की पृष्ठभूमि की सघन जांच करने का निर्देश दिया, जिसमें उसके दावे पूरी तरह झूठे पाए गए।

परिजनों ने बताया मानसिक रोगी, पर नहीं मिला कोई प्रमाण 

युवक के पकड़े जाने की सूचना पर उसके परिजन नगर थाना पहुँचे। परिजनों का दावा है कि रितेश यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर रहा है और उसे अधिकारियों से मिलने का जुनून सवार रहता है। उन्होंने उसके मानसिक रूप से बीमार होने की बात भी कही, हालांकि पुलिस के मांगने पर वे मानसिक बीमारी से संबंधित कोई भी चिकित्सीय प्रमाण पत्र पेश नहीं कर सके। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि युवक ने इस फर्जी पहचान का उपयोग कहीं किसी से ठगी करने के लिए तो नहीं किया है।

गहन जांच में जुटी पुलिस, होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई 

नगर थानाध्यक्ष संजीव कुमार ने बताया कि युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस उसके पिछले रिकॉर्ड, संपर्कों और गतिविधियों की गहनता से पड़ताल कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसने पूर्व में भी इस तरह की धोखाधड़ी की है या नहीं। फिलहाल, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है और युवक के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।