लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने का पीके ने लिया संकल्प, जन सुराज के शिक्षक संवाद में किया बड़ा ऐलान

जनसुराज के सूत्रधार व बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रशांत किशोर ने लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने की जिम्मेवारी ली है। उन्होंने कहा है कि इसके लिए वे सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेगें...

शिक्षकों के लिए पीके का बड़ा संकल्प- फोटो : धर्मेंन्द्र रस्तोगी

Chapra : बिहार विधान परिषद के सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। इसी क्रम में जन सुराज के सूत्रधार एवं बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर (पीके) छपरा पहुंचे और आरएनपी पब्लिक स्कूल के समीप आयोजित एक विशाल शिक्षक संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने जन सुराज समर्थित प्रत्याशी आफाक अहमद के पक्ष में शिक्षकों से संवाद करते हुए उनके हक और अधिकारों के लिए हरसंभव संघर्ष करने का संकल्प लिया।


लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने का किया बड़ा वादा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने बड़ा ऐलान किया कि लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने की पूरी जिम्मेदारी वे अपने ऊपर लेते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस मांग को पूरा कराने के लिए यदि उन्हें धरना देना पड़ा, आमरण अनशन करना पड़ा या मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना पड़ा, तो वे उससे भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सम्मान और उनके वेतनमान के लिए सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी।


सरकार पर दबाव बनाने के लिए शिक्षक चुनाव को बताया एक मजबूत जरिया

प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों को उनका हक दिलाने के लिए सरकार पर तगड़ा दबाव बनाना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों और प्रबुद्ध समाज से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर एनडीए समर्थित उम्मीदवार को हराएं, ताकि सत्ताधारी दल में हार का डर पैदा हो। उन्होंने कहा कि इसी राजनीतिक दबाव और जनांदोलन के बल पर सरकार को झुकने पर मजबूर किया जाएगा और शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाया जाएगा।


सरकार बनाने का नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति जवाबदेही तय करने का है चुनाव

पीके ने इस चुनाव को सरकार गिराने या बनाने का माध्यम न बताकर इसे सत्ता की जवाबदेही तय करने का चुनाव बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनावों में किस तरह से प्रलोभन देकर सत्ता हासिल की गई, यह किसी से छिपा नहीं है। आज बिहार में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, बच्चों की पढ़ाई का गिरता स्तर और युवाओं का लगातार हो रहा पलायन सबसे गंभीर मुद्दे बन चुके हैं, जिनसे निपटने के लिए बदलाव जरूरी है।


राजद और एनडीए दोनों पर साधा निशाना, आठ एमएलसी सीटों पर कड़े मुकाबले का दावा

राजद नेताओं पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने पूछा कि 2020 के चुनाव में 'समान काम के लिए समान वेतन' का वादा करने वाले नेताओं ने सत्ता में आने के बाद शिक्षकों के लिए क्या किया? उन्होंने दावा किया कि बिहार की आठ विधान परिषद सीटों पर इस बार एनडीए और जन सुराज के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने आफाक अहमद को भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।


धर्मेन्द्र की रिपोर्ट