सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: रालोसपा के बागी प्रत्याशी रामपुकार सिन्हा ने छोड़ा मैदान, एनडीए उम्मीदवार को दिया समर्थन

बिहार विधान परिषद चुनाव में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। रालोसपा के बागी प्रत्याशी रामपुकार सिन्हा ने चुनावी मैदान से हटते हुए एनडीए प्रत्याशी को समर्थन देने का एलान किया है...

रालोसपा के बागी प्रत्याशी रामपुकार सिन्हा ने छोड़ा मैदान- फोटो : धर्मेंन्द्र रस्तोगी

Chapra : बिहार विधान परिषद के 03-सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। इसी बीच चुनावी समीकरणों को पूरी तरह प्रभावित करने वाला एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के बागी प्रत्याशी सह निर्दलीय उम्मीदवार रामपुकार सिन्हा ने चुनाव मैदान से हटने की आधिकारिक घोषणा करते हुए एनडीए प्रत्याशी के समर्थन का ऐलान किया है। उनके इस फैसले को मतदान से ठीक पहले चुनावी समीकरण साधने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


एनडीए प्रत्याशी आनंद पुष्कर के पक्ष में आया समर्थन, मुकाबले की दिशा बदलने के आसार

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में विभिन्न दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा था। ऐसे में रामपुकार सिन्हा द्वारा अपना नाम वापस लेकर एनडीए प्रत्याशी आनंद पुष्कर को समर्थन देना एनडीए खेमे के लिए एक बड़ी राहत और मजबूती साबित हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षकों के बीच रामपुकार सिन्हा की व्यक्तिगत स्वीकार्यता और उनके समर्थकों का रुख इस चुनाव के परिणाम को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक और जमीनी असर आगामी मतदान के दौरान ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा।


शिक्षकों के हितों और मुद्दों पर केंद्रित है यह चुनाव, समर्थकों के रुख पर टिकी निगाहें

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव शिक्षकों के प्रतिनिधित्व, उनके लंबित मामलों और शैक्षणिक हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस तरह के चुनावों में व्यक्तिगत जनसंपर्क, शिक्षक संगठनों की पकड़ और उम्मीदवारों की साख सबसे अधिक मायने रखती है। रामपुकार सिन्हा के समर्थन की घोषणा के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि उनके समर्थक किस हद तक एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करते हैं। जानकारों का कहना है कि किसी भी नेता के समर्थन का लाभ तभी मिलता है जब वह धरातल पर मतदाताओं के रुझान में तब्दील हो सके।


मतदान के परिणामों से ही साफ होगा राजनीतिक नफा-नुकसान

फिलहाल रामपुकार सिन्हा के मैदान छोड़ने और एनडीए को समर्थन देने के फैसले ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी परिदृश्य को एक नया और दिलचस्प मोड़ दे दिया है। अन्य विरोधी दलों के उम्मीदवारों की स्थिति, स्थानीय मुद्दे और शिक्षकों का झुकाव भी इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। अब सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह नया समीकरण चुनाव परिणाम पर कितना गहरा प्रभाव डालता है।


धर्मेन्द्र की रिपोर्ट